{"_id":"a9d83ada-9841-11e2-b06d-d4ae52bc57c2","slug":"advantages-of-cross-legged-meditation","type":"story","status":"publish","title_hn":"पालथी मारकर ध्यान करने के हैं बड़े फायदे ","category":{"title":"Yog-Dhyan","title_hn":"योग-ध्यान","slug":"yoga"}}
पालथी मारकर ध्यान करने के हैं बड़े फायदे
ज्योतिर्मय
Updated Fri, 29 Mar 2013 12:55 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ऐसे लोगों की संख्या भारत में तो काफी है जिन्हें पालथी मार कर बैठने का अभ्यास है पर भारत के बाहर पालथी मार कर बैठने वाले ज्यादा नहीं हैं।
इस बारे में चिकित्सा विज्ञानियों का कहना है कि पालथी मार कर किए जाने वाले ध्यान से पुराने दर्द चिंता और तनाव से निजात पाने में मदद मिलती है।
चिकित्सा विज्ञानी और हृदयरोग विशेषज्ञ हरबर्ट बेनसन पिछले तीस साल से सेहत पर ध्यान के असर पर शोध कर रहे हैं।
इजराइल में हारवर्ड मेडिकल स्कूल के माइंड बॉडी इंस्टीट्यूट में ध्यान पर एक प्रोजेक्ट चला रहे बेनसन का कहना है कि ध्यान से जो विश्रान्ति मिलती है।
ससे चयापचय घटाने, रक्तचाप कम करने और धड़कन की दर, श्वास प्रक्रिया, मस्तिष्क की तरंगों के बेहतर होने में मदद मिलती है। प्रयोग और निष्कर्ष बताते हैं कि कैसे ध्यान अपना काम करता है।
ध्यान करते वक्त एमआरआई नामक दिमागी स्कैन यह दर्शाता है कि व्यक्ति चयापचय व हृदय की धड़कन को नियंत्रित करने वाले क्षेत्रों में गतिविधि बढ़ जाती है।
इस शोध के दौरान यह भी सामने आया कि कुर्सी पर बैठकर या खड़े होकर किए जाने वाले ध्यान की तुलना में बैठकर किया जाने वाला ध्यान ज्यादा असरकारी है।
इस तरह किए गए ध्यान में एकाग्रता के साथ मानसिक शक्तियों के विकास को किसी भी दिशा में नियोजित करने में सत्तर प्रतिशत तक सुविधा होती है।
इसी विषय पर शोध कर रहे ऐमोरी हल्थकेयर (अटलांटा) के मनोचिकित्सक स्टेन चेपमेन ने 2005 में अपनी भारत यात्रा का जिक्र किया है। यात्रा के दौरान वे योग विद्यालय पांडिचेरी के स्वामी अनिर्वाण से भी मिले थे।
स्वामी अनिर्वाण ने कहा था कि पालथी मार कर ध्यान करने से सुषुम्ना नाड़ी में स्थित शक्ति केंद्रों या सात चक्रों को सक्रिय करने में सहायता मिलती है।
अपने प्रयोगों और अनुभवों का हवाला देते हुए चेपमेन ने कहा कि पालथी मार कर किए गए ध्यान से विश्राम की जैविक प्रतिक्रिया होती है।
इन अनुभवों और प्रमाणों को देखते हुए ध्यान साधना के नए विद्यार्थी घुटनों में या पैर मोड़ कर बैठने में तकलीफ होते हुए भी पालथी मार कर बैठना सीख रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
इस बारे में चिकित्सा विज्ञानियों का कहना है कि पालथी मार कर किए जाने वाले ध्यान से पुराने दर्द चिंता और तनाव से निजात पाने में मदद मिलती है।
चिकित्सा विज्ञानी और हृदयरोग विशेषज्ञ हरबर्ट बेनसन पिछले तीस साल से सेहत पर ध्यान के असर पर शोध कर रहे हैं।
इजराइल में हारवर्ड मेडिकल स्कूल के माइंड बॉडी इंस्टीट्यूट में ध्यान पर एक प्रोजेक्ट चला रहे बेनसन का कहना है कि ध्यान से जो विश्रान्ति मिलती है।
ससे चयापचय घटाने, रक्तचाप कम करने और धड़कन की दर, श्वास प्रक्रिया, मस्तिष्क की तरंगों के बेहतर होने में मदद मिलती है। प्रयोग और निष्कर्ष बताते हैं कि कैसे ध्यान अपना काम करता है।
ध्यान करते वक्त एमआरआई नामक दिमागी स्कैन यह दर्शाता है कि व्यक्ति चयापचय व हृदय की धड़कन को नियंत्रित करने वाले क्षेत्रों में गतिविधि बढ़ जाती है।
इस शोध के दौरान यह भी सामने आया कि कुर्सी पर बैठकर या खड़े होकर किए जाने वाले ध्यान की तुलना में बैठकर किया जाने वाला ध्यान ज्यादा असरकारी है।
इस तरह किए गए ध्यान में एकाग्रता के साथ मानसिक शक्तियों के विकास को किसी भी दिशा में नियोजित करने में सत्तर प्रतिशत तक सुविधा होती है।
इसी विषय पर शोध कर रहे ऐमोरी हल्थकेयर (अटलांटा) के मनोचिकित्सक स्टेन चेपमेन ने 2005 में अपनी भारत यात्रा का जिक्र किया है। यात्रा के दौरान वे योग विद्यालय पांडिचेरी के स्वामी अनिर्वाण से भी मिले थे।
विज्ञापन
स्वामी अनिर्वाण ने कहा था कि पालथी मार कर ध्यान करने से सुषुम्ना नाड़ी में स्थित शक्ति केंद्रों या सात चक्रों को सक्रिय करने में सहायता मिलती है।
अपने प्रयोगों और अनुभवों का हवाला देते हुए चेपमेन ने कहा कि पालथी मार कर किए गए ध्यान से विश्राम की जैविक प्रतिक्रिया होती है।
इन अनुभवों और प्रमाणों को देखते हुए ध्यान साधना के नए विद्यार्थी घुटनों में या पैर मोड़ कर बैठने में तकलीफ होते हुए भी पालथी मार कर बैठना सीख रहे हैं।
विज्ञापन