महात्मा विदुर महाभारत के बुद्धिजीवियों में थे। वे कुशाग्र बुद्धि और दूरदर्शी होने के साथ ही स्वभाव से अत्यंत शांत और सरल थे। यही कारण था कि वे भगवान कृष्ण को भी प्रिय थे। जब कृष्ण जी महाभारत युद्ध से पहले शांति प्रस्ताव लेकर कौरवों के समक्ष गए थे, तब विदुर जी के पास ही ठहरे थे। ये महाराज धृतराष्ट्र और पांडु की तरह ही महर्षि वेदव्यास के पुत्र थे परंतु इनका जन्म दासी के गर्भ से हुआ था, जिसके कारण सभी गुणों से परिपूर्ण होने पर भी ये राजा नहीं बन सके। ये हस्तिनापुर के महामंत्री थे इसलिए महाराज धृतराष्ट्र इनसे महत्वपूर्ण विषयों पर इनसे सलाह लेते थे और हर बात पर खुलकर चर्चा करते थे। विदुर जी और धृतराष्ट्र के मध्य की चर्चा की महत्वपूर्ण बातें विदुर नीति के रूप में जानी जाती हैं। विदुर नीति में तीन ऐसी बुरी आदतों या व्यक्ति के स्वभाव के बारे में उल्लेख किया गया है जिसके कारण मनुष्य की आत्मा का नाश होता है। ये आदतें उसके लिए नरक के द्वार खोलती हैं साथ ही साथ जीवन भी कष्टकारी हो जाता है इसलिए मनुष्य को तुरंत ही इन आदतों का त्याग कर देना चाहिए।
विदुर नीति: ये तीन बुरी आदतें मनुष्य के लिए खोलती हैं नरक का द्वार, तुरंत कर दें त्याग
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: Shashi Shashi
Updated Mon, 14 Jun 2021 07:49 AM IST
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