महात्मा विदुर महाभारत के बुद्धिजीवियों में थे। वे कुशाग्र बुद्धि और दूरदर्शी होने के साथ ही स्वभाव से अत्यंत शांत और सरल थे। यही कारण था कि वे भगवान कृष्ण को भी प्रिय थे। जब कृष्ण जी महाभारत युद्ध से पहले शांति प्रस्ताव लेकर कौरवों के समक्ष गए थे, तब विदुर जी के पास ही ठहरे थे। ये महाराज धृतराष्ट्र और पांडु की तरह ही महर्षि वेदव्यास के पुत्र थे परंतु इनका जन्म दासी के गर्भ से हुआ था, जिसके कारण सभी गुणों से परिपूर्ण होने पर भी ये राजा नहीं बन सके। ये हस्तिनापुर के महामंत्री थे इसलिए महाराज धृतराष्ट्र इनसे महत्वपूर्ण विषयों पर इनसे सलाह लेते थे और हर बात पर खुलकर चर्चा करते थे। विदुर जी और धृतराष्ट्र के मध्य की चर्चा की महत्वपूर्ण बातें विदुर नीति के रूप में जानी जाती हैं। विदुर नीति में तीन ऐसी बुरी आदतों या व्यक्ति के स्वभाव के बारे में उल्लेख किया गया है जिसके कारण मनुष्य की आत्मा का नाश होता है। ये आदतें उसके लिए नरक के द्वार खोलती हैं साथ ही साथ जीवन भी कष्टकारी हो जाता है इसलिए मनुष्य को तुरंत ही इन आदतों का त्याग कर देना चाहिए।
विदुर नीति: ये तीन बुरी आदतें मनुष्य के लिए खोलती हैं नरक का द्वार, तुरंत कर दें त्याग
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काम: क्रोधस्तथा लोभस्तस्मादेतत्त्रयं त्यजेत्।।
इस श्लोक के अनुसार सर्वप्रथम बताया गया है कि मनुष्य को अत्यधिक कामभावना सदैव पतन की ओर ले जाती है, मनुष्य को सदैव कामभावना पर नियंत्रण रखना चाहिए। जब व्यक्ति में अत्यधिक कामभावना होती है तो वह अपना ध्यान किसी भी कार्य पर केंद्रित नहीं कर पाता है। कई बार इसी कारण व्यक्ति गलत कार्यों की ओर अग्रसर हो जाता है। जिसके कारण व्यक्ति के लिए नरक के द्वार खुलते हैं। एक मनुष्य को अपनी इंद्रियों पर नियंत्रण रखना आना चाहिए और अत्यधिक कामभावना का त्याग कर देना चाहिए।
हर मनुष्य को हंसी, रोना और क्रोध आना स्वभाविक होता है लेकिन अत्यधिक क्रोध एक ऐसी अग्नि है जो दूसरों के साथ स्वयं को भी जला देती है। जब व्यक्ति को क्रोध आता है तो उसे उस समय सही और गलत का ध्यान नहीं रहता है। उसकी सोचने समझने की शक्ति नष्ट हो जाती है। और कई बार व्यक्ति आवेग में आकर बहुत गलत कार्य कर जाता है जिसके कारण उसे दुष्परिणाम भी झेलने पड़ते हैं। कई बार व्यक्ति स्वयं का ही अहित कर बैठता है। मनुष्य को अपने क्रोध पर नियंत्रण रखना सीखना चाहिए। प्रयास करके व्यक्ति को क्रोध का त्याग कर देना चाहिए।
लोभ या लालच व्यक्ति की सबसे बुरी आदत होती है। जो व्यक्ति अपने मन में दूसरे की चीजें या धन देखकर लालच करता है उसकी अंतरात्मा का नाश होता है। लोभ के कारण मनुष्य अनुचित कार्य करने के लिए अग्रसर करता है जो एक नई एक दिन स्वयं की ही बर्बादी का कारण बनता है। व्यक्ति को लोभ का त्याग कर देना चाहिए।