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सीख: छोटे-छोटे काम से मिल सकती है सफलता
अमेंसियो ओर्टेगा
Updated Sat, 28 Apr 2018 07:04 PM IST
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मेरे पिता रेलवे में नौकरी करते थे, जबकि मां घरेलू महिला थीं। एक दिन मेरी मां एक दुकान से उधार में सामान लेने गई, लेकिन दुकानदार ने उन्हें जलील करके भगा दिया। उस घटना ने मुझ पर गहरा असर डाला। नतीजतन पैसे कमाने के लिए चौदह की उम्र में मैंने स्कूल छोड़ दिया। वर्षों तक छोटे-मोटे काम कर मैं अपने परिवार की सहायता करता रहा। 1975 में मैंने इंडिटेक्स कंपनी की शुरुआत की।
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मशहूर स्पैनिश फैशन ब्रांड जारा इसी इंडिटेक्स की उपज है। आज करीब 100 देशों के 7,000 स्टोर्स में जारा के कपड़े मिलते हैं। मैं नए फैशन के कपड़े शहर में सबसे पहले अपने यहां लाने में यकीन करता था और सप्ताह में दो बार अपना स्टॉक बदल देता था। फैशन वीक के दौरान पहनी जाने वाली ड्रेसें जहां दूसरे डिपार्टमेंटल स्टोर्स में महीनों बाद पहुंचती थी, वहीं मैं उन्हें कुछ सप्ताहों में ही अपने यहां मंगा लेता था। मेरे लिए दो चीजें हमेशा बहुत महत्वपूर्ण रहीं-मैं यह देखता कि लोग नया क्या पहन रहे हैं, इसी तरह नवीनतम फैशनों के बारे में लोगों से सुनता रहता।
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जहां दूसरी फैशन फर्में सस्ते कपड़े लेने के चक्कर में चीन से माल मंगवातीं, वहीं मैं स्पेन, पुर्तगाल और मोरक्को से कपड़े मंगवाता। हमारी अपनी मिल में इन कपड़ों की कटाई और स्थानीय टेलरों से इनकी सिलाई करवाता। इस तरह सप्लाई चेन पर मैंने नियंत्रण बनाए रखा। मैंने इस पर भी ध्यान रखा कि कपड़े अनबिके न रह जाएं। मैं ज्यादा माल इकट्ठा करके रखने के बजाय ग्राहकों से उनकी पसंद पूछता और जल्दी से जल्दी उनकी डिलीवरी करता। अस्सी साल से अधिक उम्र का हो जाने के बावजूद आज भी मैं फैशन के क्षेत्र में नवीनतम जानकारियां हासिल करने में उतनी ही दिलचस्पी लेता हूं। 2012 में मैं इंडिटेक्स के चेयरमैन के पद से हट गया।
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कंपनी में मेरे लिए अलग केबिन की व्यवस्था कभी नहीं रही। आज भी मैं रोजाना कंपनी के मुख्यालय में जाता हूं, कर्मचारियों के बीच बैठता और उन्हीं के साथ कैंटीन में लंच करता हूं। मेरा मानना है कि सफलता परिश्रम के साथ-साथ विनम्रता से भी मिलती है। किसी को भी अपनी उपलब्धियों पर अहंकार नहीं करना चाहिए। किसी भी कारोबार में ग्राहकों की संतुष्टि सबसे जरूरी है।
परिश्रम और विनम्रता के साथ-साथ ग्राहकों को संतुष्ट करने की कला भी आनी चाहिए। तभी सफलता संभव है।