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गुरप्रीत की कहानी, जिसने अपनी इच्छाशक्ति के जरिये खुद को बार-बार साबित किया
संपादकीय डेस्क, अमर उजाला
Updated Sun, 04 Feb 2018 10:10 PM IST
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गुरप्रीत अपने पिता की तरह फुटबॉल का राष्ट्रीय खिलाड़ी बनना चाहता था। लेकिन बचपन में एक दुर्घटना में उसका पैर ऐसे मुड़ा कि डॉक्टर को उसके पैर में रॉड लगानी पड़ी। गुरप्रीत का फुटबॉल करियर तो जैसे खत्म ही था, लेकिन उसने हिम्मत नहीं हारी।
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हालांकि ऑपरेशन के कुछ दिन बाद तक वह डिप्रेशन में रहा, फिर उसने तय किया कि वह एक बार फिर फुटबॉल में अपना करियर बनाने की कोशिश करेगा। गुरप्रीत को सावधानी के साथ तैयारी करने में एक साल लगे, लेकिन वह वापस खेलने लायक बन गया। उसी रॉड वाले पैर से वह भागता, किक मारता और जमकर उछल-कूद मचाता। गुरप्रीत की यह कामयाबी सभी खिलाड़ियों के लिए उम्मीद की किरण बन गई।
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आने वाले दिनों में गुरप्रीत ने जमकर अवॉर्ड्स और मेडल जीते, सिर्फ अपनी फुटबॉल की बदौलत। गुरप्रीत न सिर्फ अपने परिवार के लिए, बल्कि देश के लिए एक आदर्श बन गया। उसके अनेक प्रशंसक थे और हर जगह उसकी मिसाल दी जाने लगी। पर गुरप्रीत अपनी सफलता संभाल नहीं पाया। धीरे-धीरे उसे नशे की लत लग गई। कई बार तो पुलिस वालों ने उसे नशे की हालत में गिरफ्तार भी किया। सबका आदर्श माना जाने वाला गुरप्रीत अंततः अपनी हरकतों की वजह से सबकी नजरों में गिर गया। नशे की वजह से उसका खेल भी दिन प्रतिदिन बिगड़ता गया और कुछ ही दिनों में उसे खेल से बाहर कर दिया गया।
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लेकिन गुरप्रीत ने एक बार फिर तय किया कि वह अपना खिताब वापस पाकर रहेगा। इस बार बिना नशे के। गुरप्रीत ने एक बार फिर दिन-रात मेहनत की। समय लगा, लेकिन गुरप्रीत फिर से तंदुरुस्त हो गया और मैदान में वापस लौटा। इस बार गुरप्रीत ने पहले से कहीं ज्यादा जोर लगाया, अपने आप को बेहतर बनाता चला गया। कुछ ही दिनों में गुरप्रीत फिर से चैंपियन बना, और एक के बाद के एक अवॉर्ड और ट्रॉफी की झड़ी लगा दी।