किसी पिंजरे का इतना आदी न हो जाओ कि बाहर निकलने का साहस न बचे...

संपादकीय डेस्क, अमर उजाला Updated Wed, 21 Feb 2018 08:44 PM IST
story of a person, who know the habit of slavery by parrot behavior
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एक व्यक्ति की कहानी, जिसे तोते के व्यवहार से गुलामी की आदत का पता चला।
एक बार एक आदमी पहाड़ों पर सैर करने गया। उसने देखा, चारों तरफ ऊंचे-ऊंचे पहाड़, खूब हरे-भरे पेड़ और एकदम ताजा हवा चल रही है। उसे ऐसा लग रहा था, जैसे वह किसी पक्षी की तरह अपने पंख फैलाए हुए उड़ रहा हो। वह उन हसीन वादियों का आनंद ले ही रहा था कि एक तेज आवाज पहाड़ों से टकराकर गूंजती हुई उसके कानों में पड़ी।

ऐसा लग रहा था, जैसे कोई चिल्ला रहा हो, आजादी, आजादी। वह हैरान रह गया! पहाड़ों में ऐसा कौन चिल्ला सकता है। वह अनुमान लगाने लगा कि यह आवाज कहां से आ रही है। काफी देर बाद उसने देखा कि पिंजरे में बंद एक तोता चिल्ला रहा था, आजादी, आजादी। उसने आसपास देखने की कोशिश की कि शायद कोई पिंजरा मालिक मिल जाए। लेकिन वहां कोई नहीं था। उसने मन ही मन तय कर लिया कि वह तोते को आजाद कर देगा।

पंछियों की जगह खुले आसमान में होती है, बंद पिंजरे में नहीं। उसे आजाद करने से पहले ही उस आदमी को यह सोचकर खुशी होने लगी कि वह उस तोते को आजाद करने जा रहा है। मुस्कराते हुए उसने पिंजरे का दरवाजा खोल दिया। पर यह क्या, तोता तो डर कर और अंदर की तरफ भाग गया। वह आदमी काफी देर तक उसे पुचकारता, बाहर बुलाता रहा, लेकिन तोता पिंजरे में ही चिल्लाता रहा, आजादी, आजादी।

अंत में उस आदमी ने अंदर हाथ डालकर तोते को बाहर निकाला और पहाड़ से नीचे की तरफ छोड़ दिया। बाहर निकलते ही तोता मस्ती से उड़ने लगा। उस आदमी को बहुत सुकून मिला। वह उस रात वहीं पास के एक गांव में रुक गया। सुबह होने से कुछ ही देर पहले उसे फिर वही आवाज सुनाई दी, आजादी, आजादी। वह उठकर पिंजरे की तरफ जाने लगा, लेकिन उसने देखा कि पिंजरे का दरवाजा खुला हुआ है और तोता बाहर बैठकर चिल्ला रहा है-आजादी, आजादी। वह आदमी हैरान होकर यह अद्भुत दृश्य देखता रहा।

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