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आप भी आजमाकर देखिए, आपका कोई भी काम तब नहीं रुकेगा
राकेश्ा झा / टीम डिजिट, अमर उजाला, दिल्ली।
Updated Mon, 05 Sep 2016 03:16 PM IST
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सफलता
बुलाकी बहुत मेहनती किसान था। कड़कती धूप में उसने और परिवार के अन्य लोगों ने रात-दिन खेतों में काम किया। मौसम अच्छा रहा और बढ़िया फसल हुई। अपने हरे-भरे खेतों को देखकर उसकी छाती खुशी से फूल रही थी। फसल काटने का समय आ गया था। इसी बीच खेत में एक चिड़िया ने घोंसला बना लिया था। अंडे-बच्चे हुए। बच्चे अभी बहुत छोटे थे। एक दिन बुलाकी अपने बेटे मुरारी के साथ खेत पर आया और बोला, 'बेटा, अपने सभी रिश्तेदारों को निमंत्रण दे दो कि वे अगले शनिवार को आकर फसल काटने में हमारी सहायता करें।' सुनकर चिड़िया के बच्चे घबराए और मां से कहने लगे कि हमारा क्या होगा?
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अभी तो हम उड़ने लायक भी नहीं हुए हैं। चिड़िया ने कहा, 'तुम चिंता मत करो। कुछ नहीं होगा।' अगले शनिवार को जब बाप-बेटे खेत पर पंहुचे, तो देखा वहां कोई भी रिश्तेदार नहीं पहुंचा था। दोनों को निराशा हुई। बुलाकी ने मुरारी से कहा, 'शायद हमारे रिश्तेदार ईर्ष्या करते हैं, इसीलिए नहीं आए। अब तुम सब मित्रों को ऐसा ही निमंत्रण अगले सप्ताह के लिए दे दो।' चिड़िया के बच्चों ने वही भय जताया। चिड़िया ने फिर उन्हें सांत्वना दी।
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अगले हफ्ते फिर जब दोनों बाप-बेटे खेत पर पहुंचे, तो कोई भी मित्र सहायता करने नहीं आया। बुलाकी ने मुरारी से कहा, 'बेटा, देखा तुमने! इस बार भी कोई नहीं आया। अब तुम बाजार जाओ और फसल काटने का सामान लेकर आओ। हम दोनों मिलकर इस खेत को काटेंगे।' चिड़िया ने सुना, तो बच्चों से कहने लगी कि चलो, अब यहां से चलने का समय आ गया है। उन लोगों ने खुद फसल काटना तय कर लिया है। जब इंसान अपना काम स्वयं करने की सोच ले, तो फिर उसे न किसी के सहारे की जरूरत पड़ती है और न ही उसे कोई रोक सकता है।
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