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नजरिया सकारात्मक हो, तो चुनौतियां भी अवसर के रूप में नजर आती हैं
संपादकीय डेस्क, अमर उजाला
Updated Fri, 29 Jun 2018 03:25 PM IST
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अर्चना की कहानी, जिसके जीवन में ब्रेन ट्यूमर जैसी बीमारी सकारात्मक बदलाव ले आई।
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शहर के नामी अस्पताल में एक खास किस्म की बैठक थी। इस बैठक में डॉक्टरों के साथ कई ऐसे मरीज आए थे, जिन्हें कोई बहुत खतरनाक बीमारी थी। और वे सारे मरीज और डॉक्टर उन बीमारियों का विवरण आम जनता को दे रहे थे। पहले डॉक्टर उन बीमारियों के बारे में कुछ बोलते, फिर मरीज अपने खट्टे-मीठे अनुभव उनसे साझा करते। उन मरीजों में अर्चना भी थी, जो करीब चालीस साल की थी। वह पिछले दस साल से क्रिकेट की बॉल से थोड़े छोटे आकार के ब्रेन ट्यूमर से लड़ाई लड़ रही थी।
डॉक्टर के बोलने के बाद जब उनकी बारी आई, तो वह कहने लगीं, क्या आपको तोहफे पसंद हैं? मेरी बीमारी मेरे लिए एक तोहफे की ही तरह थी। देखने में वह कुछ-कुछ क्रिकेट की गेंद की तरह थी। लेकिन वह गेंद नहीं थी। वह एक ऐसी चीज थी, जिसने मुझे और मेरे पूरे परिवार को एक साथ लाकर खड़ा कर दिया। कई ऐसे मित्र और रिश्तेदार थे, जिनसे मैं वर्षों से नहीं मिली। पर बीमारी में वह भी मेरे करीब आने लगे और उनसे भी संवाद बन गया। उस तोहफे की वजह से मेरी जिंदगी में प्रेम के मायने बदल गए। ऐसा लगने लगा कि मैं पहले के मुकाबले ज्यादा जीवंत और उत्साहपूर्ण हूं।
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सिर्फ यही नहीं, उस तोहफे की वजह से मैं अपनी सेहत के प्रति ज्यादा सचेत रहने लगी और आते-जाते लोग भी मेरी सेहत की तारीफ करने लगे। वह तोहफा मेरी जिंदगी में चुनौतियां लाया, साथ में विनम्रता और शांति भी लाया। जैसे हर तोहफे की एक कीमत होती है, वैसे ही इस तोहफे की भी कीमत थी। इसमें बेइंतहा दर्द था, खर्च था और कष्ट था। पर इसके बदले में जो मिल रहा था, वह इन सबसे ज्यादा था। कहते हैं ,जीवन में जो भी होता है, उसका कोई उद्देश्य होता है। पर अगर हम उसे सकारात्मक नजरिये से देखें, तभी वह उद्देश्य सफलता में बदलता है।
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