डर के आगे होती है जीत, इस कहानी से जानिए

अमर उजाला, संपादकीय डेस्क Updated Fri, 16 Feb 2018 12:15 PM IST
how to wins ahead of fear
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विपिन चौदह साल का था, जब एक हादसे में उसका मुंह और हाथ जल गया था। उसकी कई सर्जरी हुई, पर चेहरा पहले जैसे नहीं हो सका। उसके हाथों की उंगलियां भी काटनी पड़ीं, जिससे हाथ भयावह दिखने लगे। जो भी उसे देखता, वह डर जाता था। विपिन उन्नीस साल का हो गया था। उसके पास एक छोटा-सा कुत्ता था। विपिन जब भी उसे टहलाने निकलता था, तो डरा सहमा-सा रहता था। वह हुड वाली जैकेट पहन कर निकलता और बाहर कदम रखते ही चेहरा ढक लेता। 
एक दिन जब वह कुत्ते को टहला कर घर पहुंचा, तो एक छोटी-सी लड़की दरवाजे पर ही खड़ी थी। पहले तो वह विपिन को देखकर डर गई। फिर बड़ी मासूमियत से पूछा, अंकल, क्या आप भूत हो? मैं आपके पड़ोस में नई आई हूं। क्या मैं आपके कुत्ते के साथ खेल सकती हूं? विपिन ने हां में सिर हिलाया और अंदर चला गया। अंदर जाकर उसने अपना हुड उतार दिया। लड़की विपिन का चेहरा देख रही थी। विपिन को लगा कि अब वह लड़की कभी उससे बात नहीं करेगी। पर लड़की बोली, वाह, आप कितने सुंदर हैं। एकदम चमकती खाल है आपकी। आप इसीलिए हुड वाली जैकेट पहनते हैं न, ताकि लोग आपकी सुंदरता न देख लें। विपिन ने अपने लिए पहली बार सुंदर शब्द सुना था। कुछ ही दिनों में वह छोटी-सी बच्ची विपिन की सबसे अच्छी दोस्त बन गई।

एक दिन लड़की ने विपिन के सामने एक अनोखी ख्वाहिश रखी। वह बोली, आज मेरा जन्मदिन है। क्या आज आप बिना हुड के मेरे दोस्तों से मिलने चलेंगे? उसका मन रखने के लिए विपिन ने हां तो कर दिया, पर वह पछता रहा था। वह पहली बार हुड के बगैर घर से बाहर निकल रहा था। लेकिन वह दिन बहुत अच्छा गुजरा और उस लड़की के सारे दोस्तों से विपिन की अच्छी दोस्ती हो गई। उस दिन विपिन को यह एहसास हुआ कि जिस डर की वजह से वह हुड में छिप जाता था, वह उसके बाहर नहीं, उसके अंदर छिपा था।

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