फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Spirituality ›   Wellness ›   Holika Dahan 2021 offer these Yagya samagri in Holika for good health

Holika Dahan 2021: होलिका दहन में इन चीजों की दें आहुति, कई बीमारियां होंगी दूर, मिलेगा स्वास्थ्य लाभ

Sun, 28 Mar 2021 08:28 AM IST
रुस्तम राणा पं. मनोज कुमार द्विवेदी, ज्योतिषाचार्य, नई दिल्ली
पं. मनोज कुमार द्विवेदी, ज्योतिषाचार्य, नई दिल्ली Published by: रुस्तम राणा Updated Sun, 28 Mar 2021 08:28 AM IST
सार

होलिका दहन के बाद दूसरे दिन होलिका की राख को शरीर पर मला जाता है। गाय के गोबर की यह राख यानी भस्म एंटीबैक्टीरियल, एंटीफंगल और एंटीवायरल होती है।

विज्ञापन
Holika Dahan 2021 offer these Yagya samagri in Holika for good health
होलिका दहन 2021 - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

होलिका दहन में विशेष सामग्री की आहुति देने से कोरोना वायरस से मुक्ति मिलेगी। इसकी सामग्री विशेष रूप से तैयार की जानी चाहिए। इस माह के पश्चात् वातावरण में कीट का प्रकोप प्रारंभ हो जाता है। इसके परिणामस्वरूप नई बीमारियां अपना रूप दिखाने लगती हैं। वर्तमान समय में कोरोना वायरस से संपूर्ण विश्व भयभीत है इसलिए होलिका में यज्ञ सामग्री ऐसी हो जिसके द्वारा कोरोना कीटाणुओं का नाश हो। 

विज्ञापन

इसमें गाय के सूखे गोबर, गाय का घी, हवनसामग्री के साथ कपूर, कपूर कचरी, नीम पत्ते, नागरमोथा, सुगंधकोकिला, सोमलता, जायफल, जावित्री, जटामांसी, अगर, तगर, चिरायता, हल्दी, गिलोय व गूगल आदि जड़ी-बूटियों का प्रचुर मात्रा में प्रयोग किया जाए। ज्वार, बाजरा, तिल एवं विभिन्न प्रकार के औषधीय जड़ी-बूटियाँ आदि सामग्री डालने से इनके अंदर के रसायन भी सूक्ष्म रूप में निकलते हैं जो पूरे गांव नगर को वायु के कण के रूप में पोषण व सुगन्ध प्रदान करते हैं। 

शायद गांव के बाहर मुहाने में यह होलिका दहन करने की परंपरा इन्हीं कारणों से थी ताकि इनसे निकली हुई गैस पूरे गांव को लाभान्वित कर सके। पूरे गाँव का वातावरण ’सुगन्धिम पुष्टि वर्धनम’ हो सके। इस यज्ञ में लकड़ी का प्रयोग न करें तो अच्छा होगा। फिर यज्ञ के उपरांत इसकी आँच में जौ की बालियां भून लें।

विज्ञापन
विज्ञापन

होलिका दहन के बाद दूसरे दिन होलिका की राख को शरीर पर मला जाता है। गाय के गोबर की यह राख यानी भस्म एंटीबैक्टीरियल, एंटीफंगल और एंटीवायरल होती है। यह राख मानव शरीर के समस्त चर्म रोगों को समाप्त करने की शक्ति रखती है और मानव शरीर के चमड़ी में होने वाले रंध्र (सूक्ष्म छेद) को खोल देती है। इन्हीं रन्ध्रों से हमारी चमड़ी बाहर के ताप और हवामान को ग्रहण करता है और पसीना निकालने के लिए का उपयोग करता है। 

वर्ष में एक बार इस भस्म को हमारे शरीर में अच्छे से लगा लेने से शरीर के अंदर की नकारात्मक उर्जा भी समाप्त होती है। गौ के गोबर के उपलों की राख को शरीर पर मलने से शरीर शुद्ध होता है, इसमें छिपा बैक्टीरिया नष्ट होता है, चर्म रोग ठीक होते हैं और शरीर को सर्दी ऋतु से गर्मी ऋतु में प्रवेश करना आसान हो जाता है।

विज्ञापन

होली के दिन होलिका दहन से पूर्व अग्निदेव की पूजा का विधान है। अग्निदेव पंचतत्वों में प्रमुख माने जाते हैं, जो सभी जीवात्माओं के शरीर में अग्नितत्व के रूप में विराजमान रहते हुए जीवन भर उनकी रक्षा करते हैं। अग्निदेव सभी जीवों के साथ एक समान न्याय करते हैं, इसलिए सनातन धर्म को मानने वाले सभी लोग भक्त प्रहलाद पर आए संकट को टालने और अग्निदेव द्वारा ताप के बदले उन्हें शीतलता देने की प्रार्थना करते हैं।
 
धर्मरूपी होली की अग्नि को अतिपवित्र माना गया है, इसलिए प्राचीनकाल में लोग इस अग्नि को अपने घर लाकर चूल्हा जलाते थे और कहीं-कहीं तो इस अग्नि से अखंड दीप जलाने की भी परंपरा है। मान्यता है कि इससे न केवल कष्ट दूर होते हैं, सुख-समृद्धि भी आती हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें आस्था समाचार से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। आस्था जगत की अन्य खबरें जैसे पॉज़िटिव लाइफ़ फैक्ट्स, परामनोविज्ञान समाचार, स्वास्थ्य संबंधी योग समाचार, सभी धर्म और त्योहार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed