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सीख: हर किसी के देखने का नजरिया और अनुभव अलग होते हैं
संपादकीय डेस्क, अमर उजाला
Updated Wed, 09 May 2018 03:14 PM IST
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कैलाश और वासिल एक छोटे से गांव में रहने वाले किसान थे। एक दिन कैलाश ने सुना कि मद्रास में एक किसान है, जिसने फसल का उत्पादन बढ़ाने के लिए एक नई तरह की तकनीक खोजी है। कैलाश ने सोचा, अगर ऐसा उपाय मुझे मिल जाए, तो फिर क्या कहना। कैलाश ने वासिल को अपने साथ आने को तैयार किया और वह दोनों मद्रास की तरफ निकल पड़े। ट्रेन में उन्हें एक शख्स मिला, जो कई बार मद्रास जा चुका था। वह बोलने में बहुत तेज था। कैलाश तो जाकर अपनी सीट पर चुपचाप सो गया, लेकिन वासिल समय बिताने के लिए उससे बातें करने लगा। उस शख्स ने अपने कई अनुभवों को वासिल के साथ साझा किया।
वासिल का मन ट्रेन से ही खट्टा होने लगा। वासिल ने कैलाश को रास्ते से ही वापस लौटने को बोला। लेकिन कैलाश ने वासिल की बातों को अनसुना कर दिया और कहा, अब जो निकले हैं, तो मिल कर ही वापस लौटेंगे। अगले दिन कैलाश ने जब वासिल से वहां किसान से चल कर मिलने को कहा, तो वासिल ने जाने से मना कर दिया। कैलाश अकेले उस किसान से मिला और वह दोनों वापस अपने गांव लौट गए। अगले साल जब फसल तैयार हुई, तो वासिल ने देखा कि कैलाश की फसल पिछले वर्ष की तुलना में दोगुनी से भी ज्यादा हुई।
वासिल ने पूछा, यह तुमने कैसे किया। कैलाश ने कहा, मद्रासी किसान की तकनीक अपनाकर मैं सफल हो गया। कैलाश बोला, यह जरूरी नहीं होता कि हर किसी का अनुभव एक जैसा हो। लेकिन हम अकसर दूसरे के अनुभवों से अपना मन बना लेते हैं और ठीक ऐसा ही तुमने भी किया। हम कई लोगों से मिलते हैं और उनसे बातें करते हैं। उन लोगों की बातें हमारे ऊपर प्रभाव डालती हैं। इसलिए हमे वही बातें करनी चाहिए, जिसकी सत्यता का कोई प्रमाण हो। मैं यह सारी बात तुम्हें तब भी बता सकता था, जब हम वापस लौट रहे थे। लेकिन तब मैं अपनी बात को प्रमाणित नहीं कर पाता।
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वासिल का मन ट्रेन से ही खट्टा होने लगा। वासिल ने कैलाश को रास्ते से ही वापस लौटने को बोला। लेकिन कैलाश ने वासिल की बातों को अनसुना कर दिया और कहा, अब जो निकले हैं, तो मिल कर ही वापस लौटेंगे। अगले दिन कैलाश ने जब वासिल से वहां किसान से चल कर मिलने को कहा, तो वासिल ने जाने से मना कर दिया। कैलाश अकेले उस किसान से मिला और वह दोनों वापस अपने गांव लौट गए। अगले साल जब फसल तैयार हुई, तो वासिल ने देखा कि कैलाश की फसल पिछले वर्ष की तुलना में दोगुनी से भी ज्यादा हुई।
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वासिल ने पूछा, यह तुमने कैसे किया। कैलाश ने कहा, मद्रासी किसान की तकनीक अपनाकर मैं सफल हो गया। कैलाश बोला, यह जरूरी नहीं होता कि हर किसी का अनुभव एक जैसा हो। लेकिन हम अकसर दूसरे के अनुभवों से अपना मन बना लेते हैं और ठीक ऐसा ही तुमने भी किया। हम कई लोगों से मिलते हैं और उनसे बातें करते हैं। उन लोगों की बातें हमारे ऊपर प्रभाव डालती हैं। इसलिए हमे वही बातें करनी चाहिए, जिसकी सत्यता का कोई प्रमाण हो। मैं यह सारी बात तुम्हें तब भी बता सकता था, जब हम वापस लौट रहे थे। लेकिन तब मैं अपनी बात को प्रमाणित नहीं कर पाता।
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