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Vivah panchami 2021: दूर होती है विवाह की बाधाएं, पढ़िए श्रीराम और सीताजी के विवाह की कथा

Wed, 08 Dec 2021 08:02 AM IST
शशि सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: शशि सिंह Updated Wed, 08 Dec 2021 08:02 AM IST
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vivah panchami 2021 date lord ram and sita vivah katha
विवाह पंचमी 2021

Vivah panchami 2021: हिंदू पंंचाग के अनुसार विवाह पंचमी तिथि पर भगवान राम और माता सीता का विवाह हुआ था। प्रत्येक वर्ष मार्गशीर्ष मास में शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि के विवाह पंचमी के रूप में मनाया जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार, इस बार विवाह पंचमी 08 दिसंबर 2021 दिन बुधवार को है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान राम और सीता का विवाह हुआ था इसलिए विवाह पंचमी को राम-सीता विवाह उत्सव के रूप में मनाते हैं। विवाह पंचमी पर भगवान राम और माता सीता के मंदिरों में भव्य आयोजन किए जाते हैं। विधि-विधान के साथ प्रभु राम और माता सीता का पूजन किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन ही तुलसी दास ने रमाचरितमानस पूर्ण की थी। इसलिए इस दिन का और भी अधिक महत्व माना गया है। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से पूजन करने से विवाह में आने वाली अड़चने दूर होती हैं और वैवाहिक जीवन सुखमय बनता है। इस दिन भगवान राम और माता सीता के विवाह की कथा पढ़ने का विशेष महत्व माना गया है। 

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विवाह पंचमी माता सीता और भगवान राम के विवाह की कथा-
माता सीता राजा जनक की पुत्री थी। उन्हें जनक दुलारी या जनक नंदिनी के नाम से जाना जाता है। प्रचलित कथाओं के अनुसार, एक बार राजा जनक हल चला रहे थे, उस समय उन्हें धरती से एक कन्या की प्राप्ति हुई इस कन्या का नाम ही उन्होंने सीता रखा। राजा जनक देवी सीता को पुत्र रूप में पाकर अति प्रसन्न हुए और बहुत ही प्रेम के साथ उन्होंने माता सीता का पालन-पोषण किया।  एक बार माता सीता ने भगवान शिव का धनुष उठा लिया। इस धनुष को उठाने का सामर्थ्य परशुराम जी के अलावा किसी और में नहीं था। यह देख राजा जनक समझ गए कि ये कोई साधारण बालिका नहीं है और उन्होंने उसी समय निर्णय लिया कि जो भी शिव जी के इस धनुष को उठा लेगा उसी के साथ वे अपनी पुत्री सीता का विवाह करेंगे।
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जब देवी सीता विवाह के योग्य हुई तो राजा जनक ने उनके लिए स्वयंवर रखा और यह घोषणा कर दी कि जो भी इस धनुष को उठाकर प्रत्युंचा चढ़ा देगा वे उसी के साथ अपनी पुत्री सीता का विवाह करेंगे। महर्षि वशिष्ठ के साथ भगवान राम और लक्ष्मण जी भी स्वयंवर में उपस्थित थे। स्वयंवर आरंभ होने के बाद कोई भी उस धनुष को उठा नहीं पाया तो राजा जनक अत्यंत निराश हुए और बोले कि क्या कोई भी ऐसा नहीं है जो मेरी पुत्री के योग्य हो। तब महर्षि वशिष्ठ ने भगवान राम को शिव जी के धनुष की प्रत्यंचा चढ़ाने की आज्ञा दी। उनकी आज्ञा का पालन करते हुए भगवान राम शिव जी के धनुष की प्रत्यंचा चढ़ाने लगे और धनुष टूट गया। तब राजा जनक ने श्री राम जी से सीता का विवाह करा दिया। इस प्रकार माता सीता और भगवान राम का विवाह हो गया। आज भी उन्हें एक आदर्श दंपत्ति माना जाता है।
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