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Varalakshmi Vratam 2021: वरलक्ष्मी व्रत आज, इस विधि से करें पूजा और धन प्राप्ति के लिए करें उपाय
Fri, 20 Aug 2021 10:45 AM IST
रुस्तम राणा
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: रुस्तम राणा
Updated Fri, 20 Aug 2021 10:45 AM IST
सार
यह व्रत विवाहित महिलाएं करती हैं। वरलक्ष्मी व्रत में विवाहित महिलाएं अपने पति, बच्चों और परिवार से अन्य सदस्यों की मंगलकामना के लिए दिनभर उपवास रहकर मां लक्ष्मी की पूजा आराधना करती हैं।
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श्रावण मास वरलक्ष्मी व्रत
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
Varalakshmi Vratam 2021: हर साल श्रावण मास के आखिरी शुक्रवार को वरलक्ष्मी व्रत रखा जाता है। आज सावन का आखिरी शुक्रवार है जिस कारण यह व्रत भी आज है। हिंदू धर्म में व्रत और उपवास का विशेष महत्व होता है। वरलक्ष्मी व्रत माता लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए किया जाता है। यह व्रत विवाहित महिलाएं करती हैं। वरलक्ष्मी व्रत में विवाहित महिलाएं अपने पति, बच्चों और परिवार से अन्य सदस्यों की मंगलकामना के लिए दिनभर उपवास रहकर मां लक्ष्मी की पूजा आराधना करती हैं।
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वरलक्ष्मी पूजन सामग्री
वरलक्ष्मी पूजा में विवाहित महिलाएं कठिन उपवास रखने के साथ इनकी अलग तरह से पूजा होती है। पूजन सामग्री में मां वरलक्ष्मी की प्रतिमा, कुमकुम, हल्दी, चंदन, माला फूल, पान के पत्ते, अक्षत के साथ श्रृंगार की सभी सामग्रियों को शामिल किया जाता है।
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वरलक्ष्मी पूजा विधि
वरलक्ष्मी का त्योहार मुख्य रूप से दक्षिणभारत के हिस्सों में मनाया जाने वाला प्रमुख त्योहार है। वरलक्ष्मी व्रत में सुबह जल्दी उठकर घर की साफ-सफाई की जाती है। पूजास्थल को सजाया जाता है और गंगाजल से सभी जगहों को शुद्ध किया जाता है और व्रत का संकल्प लिया जाता है। इसके बाद मां वरलक्ष्मी की प्रतिमा या मूर्ति को नए कपड़े पहनाएं जाते हैं और उनका श्रृंगार किया जाता है। इसके बाद मां लक्ष्मी की मूर्ति के पास भगवान गणेश की प्रतिमा रखी जाती है। इसके बाद कलश और अक्षत से वरलक्ष्मी का स्वागत किया जाता है। इसके बाद पूजन सामग्री की सभी चीजों को वरलक्ष्मी को अर्पित किया जाता है। इसके बाद आरती से मां को प्रसन्न कर वरलक्ष्मी व्रत कथा का पाठ किया जाता है। इसके बाद मां को भोग लगाकर प्रसाद का वितरण किया जाता है।
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वरलक्ष्मी व्रत मंत्र
पद्यासने पद्यकरे सर्व लोकैक पूजिते।
नारायणप्रिये देवी सुप्रीता भव सर्वदा।।
देवी लक्ष्मी के वरलक्ष्मी का अवतार क्षीर सागर से हुआ है। वरलक्ष्मी का रंग दुधिया महासागर की भांति है। मां वरलक्ष्मी 16 श्रृंगार कर सजी रहती हैं। माता लक्ष्मी का यह रूप और नाम भक्तों की सभी मनोकामनओं को पूरा करने वाला माना गया है। इस कारण से इन्हें वरलक्ष्मी कहा गया है। जो भी भक्त मां लक्ष्मी की पूजा और उपवास रख भक्तिभाव से पूजा आराधना करता है उसके परिवार में सुख और समृद्धि का वास होता है।
करें ये उपाय
शाम को पूजन करने के बाद पीपल के पेड़ पर सुगंधित धूप और आटे का दीपक जलाएं। माना जाता है कि ऐसा करने से मां लक्ष्मी आपके घर में वास करेंगी और घर की दरिद्रता और गरीबी दूर हो जायेगी।