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इंद्र की एक गलती से जन्मी स्वर्ग की सबसे सुंदर अप्सरा उर्वशी

Wed, 11 Mar 2015 11:33 AM IST
Updated Wed, 11 Mar 2015 11:33 AM IST
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urvasi apsra story badrinath nar narayan katha

पुराणों के अनुसार देवताओं के राजा इंद्र है और इनके दरवार में एक से एक सुंदर अप्सराएं रहती हैं। अप्सराओं के विषय में ऐसा कहा गया है कि इनका यौवन कभी ढ़लता नहीं है यानी यह हमेशा जवान और खूबसूरत दिखती हैं।

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अपने रूप और यौवन से यह स्वर्ग लोक की शोभा बढ़ाती हैं साथ ही अपने नृत्य और अदाओं से देवताओं का मनोरंजन भी करती हैं।

देवराज इंद्र इनका कूटनीतिक इस्तेमाल अपने शत्रुओं को पराजित करने में भी करते हैं। पुराणों में कई ऐसी कथाएं मिलती हैं जिसमें बताया गया है कि इंद्र ने अपने आसान छिन जाने के डर से तपस्या में लीन तपस्वियों के पास अप्सराओं को भेजा।
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अप्सराओं ने अपने रूप यौवन से तपस्वियों को तपस्या से हटाकर घर गृहस्थी में लगा दिया। इसी तरह का एक काम जब इंद्र ने अप्सरा से करवाया तो स्वर्ग की सबसे सुंदर अप्सरा उर्वशी का जन्म हुआ।
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ऐसे जन्मीं उर्वशी अप्सरा

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एक समय भगवान विष्णु ने नर और नारायण के रुप में अवतार लिया। नर और नारायण भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए केदारखंड में उस स्थान पर तपस्या करने लगे जहां पर आज ब्रदीनाथ धाम है।

इनकी तपस्या से इंद्र परेशान होने लगे। इंद्र को लगने लगा कि नर और नारायण इंद्रलोक पर अधिकार न कर लें। इसलिए इंद्र ने अप्सराओं को नर और नारायण के पास तपस्या भंग करने के लिए भेजा।

लेकिन नर और नारायण इनकी ओर आकर्षित नहीं हुए बल्कि नारायण ने इंद्र की अप्सराओं से भी सुंदर अप्सरा को अपनी जंघा से उत्पन्न कर दिया। इस अप्सरा का नाम उर्वशी रखा। नारायण ने इस अप्सरा को इंद्र को भेंट कर दिया।

जब उर्वशी का दिल आया एक इंसान पर

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उर्वशी स्वर्ग की सबसे सुंदर अप्सरा थी इसलिए सभी देव इनके रूप पर मोहित थे। इसके बावजूद भी उर्वशी का हृदय पृथ्वी पर रहने वाले एक मनुष्य पर आ गया।

इस मनुष्य का नाम था अर्जुन। बात उस समय कि जब अर्जुन महाभारत युद्घ में विजय प्राप्त करने के लिए इंद्रलोक से दिव्यास्त्र लेने गए थे।

इंद्रलोक में भ्रमण करते हुए एक बार अर्जुन और उर्वशी की नजरें मिली और उर्वशी अर्जुन को दिल दे बैठी। लेकिन अर्जुन ने उर्वशी से विवाह करने से इंकार कर दिया। इससे उर्वशी नाराज हो गई और अर्जुन को नपुंसक होने का शाप दे दिया।

इसलिए अर्जुन ने रूपवती अप्सरा से विवाह करने से इंकार किया

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एक बार इंद्र की सभा में उर्वशी नृत्य कर रही थी। उस सभा में पृथ्वी के एक राजा पुरूरवा भी आए हुए थे। नृत्य करते हुए जब उर्वशी की दृष्टि पुरूरवा पर गई तो वह मोहित हो गई। इससे उर्वशी का ताल बिगड़ गया।

इससे इन्द्र ने उर्वशी को पृथ्वी लोक में जाने का शाप दे दिया। इन्द्र ने उर्वशी से कहा कि जब तुम पुरूरवा को नग्न देख लोगी तब यह शाप समाप्त हो जाएगा इसके बाद वापस स्वर्ग लोक में तुम्हारा आगमन हो सकेगा।

पृथ्वी पर आकर उर्वशी ने पुरूरवा से विवाह किया और इनकी नौ संतान हुई। काफी समय बीत जाने के बाद गंधर्वों के मन में उर्वशी को वापस स्वर्ग लाने की इच्छा हुई।

गन्धर्वों ने विश्वावसु नामक गंधर्व को उर्वशी के मेष चुराने के लिए भेजा। जिस समय विश्वावसु मेष चुरा रहा था, उस समय पुरूरवा नग्नावस्था में थे। आहट सुनकर पुरूरवा उसी अवस्था में विश्वावसु को पकड़ने दौड़े।

अवसर का लाभ उठाकर गन्धर्वों ने उसी समय प्रकाश कर दिया जिससे उर्वशी ने पुरूरवा को नग्न देख लिया। इसके बाद उर्वशी वापस स्वर्ग चली गई।

अर्जुन पुरूरवा के वंशज थे इसलिए उन्होंने उर्वशी को माता के रुप में स्थान दिया। यही कारण था कि अर्जुन ने रूपवती अप्सरा के प्रेम प्रस्ताव को ठुकरा दिया।

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