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तुलसी विवाह: तुलसी में है इतने सारे गुण, जानिए तुलसी विवाह की परंपरा, धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व

धर्म डेस्क, अमर उजाला Updated Fri, 08 Nov 2019 08:10 AM IST
tulsi vivah
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हिन्दू धर्म में जितना महत्व तुलसी के पौधे का होता है शायद ही किसी अन्य पौधे का होगा। तुलसी का महत्व न सिर्फ धार्मिक है बल्कि इसका वैज्ञानिक और औषधि के नजरिए से भी खास है।  व्रत, उपवास, कथा, धार्मिक आयोजनों और भगवान के भोग में तुलसी का होना जरूरी होता है।
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तुलसी पूजा
हिंदू धर्म में आस्था रखने वालों के घरों तुलसी का पौधा आपको जरूर मिल जाएगा। तुलसी की पूजा सुबह और शाम के दोनों समय की जाती है। भगवान विष्णु और श्रीकृ्ष्ण की  पूजा में बिना तुलसी दल के अधूरी मानी जाती है। हनुमान जी को भी तुलसी दल का भोग लगाया जाता है। तुलसी के पौधे का महत्व पद्मपुराण, ब्रह्मवैवर्त, स्कंद और भविष्य पुराण में भी बताया गया है।

तुलसी विवाह
कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की देवउठनी एकादशी पर तुलसी विवाह का आयोजन किया जाता है। मान्यता है कि इस दिन ही भगवान विष्णु चार महीने की गहरी निद्रा से जागते हैं और सृष्टि का संचालन अपने हाथों में लेते हैं। इस दिन भगवान विष्णु के शालिग्राम स्वरूप के संग तुलसी का विवाह संपन्न कराया जाता है। उसके बाद सारे शुभ कार्य शुरू किये जाते है। तुलसी विवाह से कन्यादान के बराबर पुण्य मिलता है और घर पर  सुख- संपदा, वैभव-मंगल विराजते हैं।

तुलसी का धार्मिक महत्व 
1- भगवान को तुलसी दल का भोग लगाने से शुभफल की प्राप्ति होती है।
2- पद्म पुराण में कहा गया कि जहां पर तुलसी का एक भी पौधा होता है। वहां ब्रह्मा, विष्णु, शंकर निवास करते हैं। 
3- जिस भोग में तुलसी नहीं होता उसे भगवान स्वीकार नहीं करते।
4- तुलसी की पूजा विशेष कर स्त्रियां करती हैं। इससे उन्हें सौभाग्य औरवंश समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
5- गरुण पुराण के अनुसार मृत्यु का समय नजदीक आने पर जो प्राणी तुलसी के पत्ते के साथ जल पीता है उसे हर तरह के पापों से मुक्ति मिल जाती है।
6- जहां पर भगवान की पूजा में बासी फूल और बासी जल वर्जित हैं लेकिन तुलसीदल बासी होने पर भी वर्जित नहीं मानी जाती। तुलसी दल किसी भी स्थिति में अपवित्र नहीं मानी जाती।
7- सुबह-सुबह तुलसी का दर्शन करने से दान और मन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। 
8- कहा जाता है कि देव और दानवों द्वारा किए गए समुद्र मंथन के समय जो अमृत धरती पर मिला उसी के प्रभाव से ही तुलसी की उत्पत्ति हुई।

तुलसी पूजन की सामग्री
गन्ना, विवाह मंडप की सामग्री, सुहागन सामग्री, घी, दीपक, धूप, सिन्दूर , चंदन, नैवद्य और पुष्प आदि।

तुलसी पूजन का श्रेष्ठ मुहूर्त
शाम 7.50 से 9.20 तक शुभ चौघडियां में तुलसी पूजन करना चाहिए।

तुलसी विवाह की पूजन विधि
- तुलसी के पौधे का गमले को गेरु और फूलो से सजाएं।
- तुलसी के पौधे के चारों ओर गन्ने का मंडप बनाएं।
- तुलसी के पौधे के ऊपर लाल चुनरी चढ़ाएं।
- तुलसी को चूड़ी और श्रृंगार के अन्य सामग्रियां अर्पति करें।
- श्री गणेश जी पूजा और शालिग्राम का विधिवत पूजन करें।
- भगवान शालिग्राम की मूर्ति का सिंहासन हाथ में लेकर तुलसीजी की सात परिक्रमा कराएं।
- आरती के बाद विवाह में गाए जाने वाले मंगलगीत के साथ विवाहोत्सव पूर्ण किया जाता है।

तुलसी नामाष्टक
वृन्दा वृन्दावनी विश्वपूजिता विश्वपावनी। पुष्पसारा नन्दनीच तुलसी कृष्ण जीवनी।।
एतभामांष्टक चैव स्रोतं नामर्थं संयुतम। य: पठेत तां च सम्पूज् सौऽश्रमेघ फलंलमेता।।


तुलसी का वैज्ञानिक महत्व और रिसर्च

- तुलसी का पौधा एक नेचुरल एयर प्यूरिफायर भी है जो वायु प्रदूषण को कम करने में बहुत कारगर होता है।
- तुलसी के पौधे में यूजेनॉल नाम का कार्बनिक योगिक होता है जो मच्छर, मक्खी और कीड़े भगाने का काम भी करता है। 
- तुलसी में एंटीऑक्सीडेंट होता है जो शरीर की मृत कोशिकाओं को ठीक करने में मददगार साबित होता है।
- तुलसी के नियमित सेवन से शरीर में ऊर्जा का प्रवाह नियंत्रित होता है और व्यक्ति की उम्र बढ़ती है।
- रिसर्च में पाया गया है कि टी.बी-मलेरिया और अन्य संक्रामक रोगों से निपटने के लिए तुलसी कारगर है।
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