कुर्सी, कपड़े या जमीन पर बैठकर हवन पूजन क्यों नहीं करना चाहिए
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हवन और पूजन के कुछ शास्त्रगत नियम हैं जिनमें एक नियम यह है कि कुर्सी, कपड़ा या जमीन पर बैठक हवन और पूजन नहीं करना चाहिए।
शास्त्रों में बताया गया यह नियम सिर्फ धार्मिक कारणों से नहीं है बल्कि इनका वैज्ञानिक और व्यवहारिक कारण भी है।
यह कारण ऐसे हैं जिन्हें जानेंगे तो आप भी यह सोचने पर मजबूर हो जाएंगे कि हमारे ऋषि मुनि और संतजन हर चीज पर कितनी गहराई से सोचते थे।
ध्यान पूजन के समय इन आसानों का प्रयोग नहीं करना चाहिए
कुछ लोग पूजा, हवन एवं ध्यान के समय इन बातों पर गौर नहीं करते और सीधे जमीन पर बैठकर या फिर चादर या अन्या कपड़े बिछाकर पूजा शुरु कर देते हैं। जबकि ऐसा करना धार्मिक और वैज्ञानिक दृष्टि से भी गलत है। कुछ लोग कुर्सी पर बैठकर भी ध्यान, पूजन करते हैं जो उचित नहीं है।
हवन, पूजन एवं ध्यान के समय सुखासन या पद्मासन मुद्रा में बैठने का नियम है। कुर्सी पर मुद्रा में नहीं बैठा जा सकता। इससे बार-बार ध्यान भंग होता है जिससे आपको ध्यान और पूजन का पूर्ण लाभ नहीं मिल पाता है।
दूसरी ओर पूजन हवन के समय हम ईश्वर के प्रति समर्पण की भावना दर्शाते हैं जो कुर्सी पर बैठने से संभव नहीं है।
जमीन पर बैठकर पूजा करने की जहां तक बात है तो इसकी मनाही इसलिए है क्योंकि जमीन गर्मी में तप जाता है और सर्दी में सर्द हो जाता है।
इन दोनों ही स्थितियों में यह स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। इसके अलावा भूमि शरीर की उर्जा को नीचे की ओर खिंचती है जो ध्यान पूजन में नकारात्मक प्रभाव उत्पन्न करता है।
हवन, पूजन एवं ध्यान के समय इन आसनों का प्रयोग करना चाहिए
शास्त्रों के अनुसार हवन या पूजन के समय आसन के रुप में कुश के बने आसन का प्रयोग करना चाहिए। अगर कुश का बना आसन उपलब्ध नहीं हो तब कंबल का प्रयोग किया जा सकता है। धार्मिक दृष्टि से कुश के आसन और कंबल शुद्घ माने जाते हैं।
जबकि वैज्ञानिक कारण यह है कि कुशा के असान और कंबल ध्यान, पूजन एवं हवन के समय व्यक्ति की उर्जा को शरीर में बनाए रखने में सहायक होते हैं।
इससे पृथ्वी और शरीर के बीच उर्जा का संचार नहीं हो पाता है जिससे व्यक्ति अपनी उर्जा को मस्तिष्क में केन्द्रित करके अपनी साधना पूरी कर सकता है।
कपड़े के आसान का प्रयोग क्यों नहीं?
कपड़े के आसान का प्रयोग न करने के पीछे एक तो व्यवहारिक कारण यह है कि यह शुद्घ नहीं माना गया है।
दूसरा कारण यह है कि कपड़े के आसन धरती से मानव पिंड को अलग करने में कारगर नहीं होते। इससे शरीर से धरती की ओर उर्जा का संचार होता रहता है।
तीसरा कारण यह माना गया है कि वस्त्र यह दर्शाता है कि आप अभाव में जी रहे हैं क्योंकि संभव है कि आप जिन वस्त्रों को पूजा में प्रयोग कर रहे हैं उसी का घर के अन्य कामों में प्रयोग करते हों।
जबकि शास्त्रगत नियम है कि पूजा-पाठ से संबंधित चीजें घर के अन्य कार्यों में प्रयोग नहीं होना चाहिए।