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नवरात्र के अंतिम दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा क्यों?
राकेश झा/टीम डिजिटल
Updated Wed, 21 Oct 2015 09:10 AM IST
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नवरात्र के नवम दिन मां के नवम रूप सिद्धिदात्री देवी की पूजा होती है। मां सिद्घिदात्री कमल पर विराजमान रहती हैं और इनका वाहन सिंह है। माता की चार भुजाएं हैं।
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यह अपने हाथों में गदा, चक्र, शंख और कलम पुष्प धारण करती हैं। मां सिद्धिदात्री प्रसन्न होने पर भक्तों को मनोवांछित फल एवं सिद्धियां प्रदान करती हैं। ऐसा मान्यता है कि भगवान शिव को अष्टसिद्धियां देवी सिद्धिदात्री से ही मिली हैं।
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शास्त्रों में कहा गया है कि माता सिद्धिदात्री से सिद्घियां पाने के लिए प्रतिपदा से नवमी तिथि तक मां के सभी नौ रूपों की पूजा करनी चाहिए। सभी देवियों के प्रसन्न होने पर ही मां सिद्धिदात्री की कृपा प्राप्त होती है। यही कारण है कि नवरात्र के अंतिम दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा होती है।
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इस दिन मां उन भक्तों पर कृपा करती है जिन्होंने श्रद्धा भक्ति एवं समर्पण भाव से नवरात्र में उनकी पूजा की है।
ध्यान मंत्र
सिद्धगधर्व यक्षाद्यैरसुरैरमरैरपि।
सेव्यमाना सदा भूयात सिद्धिदा सिद्धिदायिनी।।