विज्ञापन

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव पर महारास : मटकी फोड़ने आया माखन चोर

- स्वामी विशालानन्द, दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान Updated Mon, 03 Sep 2018 01:20 PM IST
matki
matki
विज्ञापन
ख़बर सुनें
श्री कृष्ण-एक परिवर्तनकारी युगपुरुष जिनकी क्रांति में भी शांति के छंद थे, विध्वंस में भी महा-सृजन का उद्घोष था। जिन्होंने महाभारत में महान-भारत का चित्र गढ़ा। जिनकी लीलाओं में था अध्यात्म का सरसतम सार और सामाजिक परिवर्तन का दिव्य शंखनाथ। ऐसे युगांतकारी भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव पर सर्वश्री आशुतोष महाराज की प्रेरणा से दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान ने श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का आयोजन किया। दिव्य धाम में श्रीकृष्ण और गोपियों के महारास के जरिए न केवल उसके आध्यात्मिक रहस्यों को समझाया गया, बल्कि धर्म में नारी की महत्ता को बड़े ही प्रबल तरीके से स्थापित किया गया।
विज्ञापन
श्रीकृष्ण की हर लीला में कई अध्यात्मिक रहस्य छुपे हैं, जिससे आम जन अनजान है। ऐसे लीलाधर के लीला रहस्यों को बड़े ही सरल तरीके से मंचित किया गया। मंदिरों में नारी का प्रवेश, भ्रूण हत्या, नारी सशक्तिकरण और नारी के सम्मान जैसे विषय को श्रीकृष्ण की कथाओं के मंचन से बड़े ही खूबसूरत तरीके से सर्वश्री आशुतोष महाराज के शिष्यों ने प्रस्तुत किया। आशुतोष महाराज का मानना है कि श्रीकृष्ण साक्षात् ब्रह्म हैं और उन्होंने अपने समय से आगे जाकर समाज के उन समस्याओं का समाधान प्रस्तुत किया, जिसके प्रति आज भी समाज में अनेक तरह की वर्जनाएं मौजूद हैं। दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान ने एक नहीं, अनेक लीलाओं का मंचन किया और हर लीला में आज के संदर्भ का संदेश छुपा था।

1. श्रीकृष्ण अवतार-
भारत ही वह धरती है, ईश्वर ने बार-बार अवतार लिया है। ईश्वर अवतार क्यों लेते हैं? अवतार का उद्देश्य क्या है? इस विषय पर वैदिक, वैज्ञानिक और वास्तविक रूप से मंचन ओर विवेचना की गयी।  

2. मटकी फोड़-
श्रीकृष्ण की बाल लीला का प्रस्तुतीकरण किया गया। किस प्रकार मटकी फोड़ कर भगवान कृष्ण और उनके बाल सखाओं ने मथुरा द्वारा किए जा रहे दमन का विरोध किया था। उन्होंने माखन की मटकी फोड़ कर यह प्रदर्शित किया था कि गोकुल के ग्ववाल-बाल अगर कुपोषित हैं तो वह गोकुल के माखन को मथुरा के राज-दरबार में जाने नहीं देंगे। इस पर पहला अधिकार गोकुल के बालकों का है।

3. महारास-
आध्यात्मिकता से सराबोर वास्तविक महारास के रहस्यों के मंचन ने दर्शकों को भाव-विभोर कर दिया। श्रीकृष्ण की विरह में व्याकुल गोप एवं गोपिकाओं के माध्यम से यह समझाने का प्रयास किया गया कि जब तक उस वह ईश्वर को अपने भीतर तत्व से नहीं जानेंगे वह उस परमात्मा का स्थायी सनीद्ध्य प्रपट नहीं कर पाएंगे। आत्मिक चेतना का ईश्वरीय तत्व से योग ही महारास है। इसमे प्रधानता आत्मा की है; स्त्री अथवा पुरुष होने से कोई फर्क नहीं पड़ता। आध्यात्मिक ज्ञान पर सभी का अधिकार है।

4. पोंड्रिक और वासुदेव की कहानी-
इस सुंदर मंचन के जरिए समझाया गया कि वास्तव में ईश्वर की पहचान कैसे किया जाए? कैसे पाखंडी और लालची लोग स्वयं को ईश्वर सिद्ध करने का प्रयास करते हैं, लेकिन सत्य तो उद्घाटित होकर ही रहता है। ईश्वर और ईश्वर की प्रभुता स्वयं प्रकट हो जाती है और पाखंडियों की कलई खुल जाती है।

5. श्रीकृष्ण का गोकुल से प्रस्थान और गोपियों का विरह-
भगवान और भक्त के बीच प्रेम को दर्शाते इस मंचन को देखकर दर्शक भाव-विह्वल हो उठे। अपने अराध्य से बिछड़ना एक भक्त के लिए कितनी पीड़ादायक होता है, लेकिन यह उद्देश्य सिद्धि के लिए बेहद अनिवार्य होता है।

6.  मीरा की भक्ति और उनका क्रांतिकारी रूप-
भक्त मीरा ने नारी होकर भगवान श्रीकृष्ण के प्रेम में समाज की जड़ताओं को किस प्रकार तोड़ा, यही इस मंचन का सार था। धर्म के क्षेत्र में महिलाओं के अधिकार को पुनः स्थापित करने के लिए हर नारी को मीरा बनने की आवश्यकता है। एक नारी सामाजिक जकड़न से निकल कर किस तरह भक्ति से परमात्मा को पा सकती है, यही है मीरा बाई की कहानी।

Recommended

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
अमर उजाला की खबरों को फेसबुक पर पाने के लिए लाइक करें

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all spirituality news in Hindi related to religion, festivals, yoga, wellness etc. Stay updated with us for all breaking news from fashion and more Hindi News.

विज्ञापन

Spotlight

विज्ञापन

Most Read

Religion

जानें ज्ञान को लेकर क्या कहता है इस्लाम

मनुष्य के लिए आखिर क्यों जरूरी है ज्ञान? कुरान की रोशनी में आइए जानते हैं ज्ञान के महत्व के बारे में —

21 नवंबर 2018

विज्ञापन

Related Videos

ऑस्ट्रेलिया से 11 रन ज्यादा बनाकर भी 4 रन से मैच हार गया भारत

बुधवार को भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच खेले गए पहले टी20 मैच का नतीजा भारतीय फैंस के लिए अच्छा नहीं रहा। भारत को डकवर्थ -लुईस नियम के मुताबिक चार रन की बेहद नजदीकी हार झेलनी पड़ी। हालांकि मैच में शिखर धवन की ‘गब्बरगिरी’ ने सबका दिल जीत लिया।

21 नवंबर 2018

आज का मुद्दा
View more polls

Disclaimer

अपनी वेबसाइट पर हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर अनुभव प्रदान कर सकें, वेबसाइट के ट्रैफिक का विश्लेषण कर सकें, कॉन्टेंट व्यक्तिगत तरीके से पेश कर सकें और हमारे पार्टनर्स, जैसे की Google, और सोशल मीडिया साइट्स, जैसे की Facebook, के साथ लक्षित विज्ञापन पेश करने के लिए उपयोग कर सकें। साथ ही, अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।

Agree