Sawan 2021: सावन में महादेव की पूजा से मिलता है शिव तत्व
जीवन की वह स्थिति जब हम विषमता में भी जीना सीख जाएं, जब हम निर्लिप्त रह कर बांटकर खाना सीख जाएं और जब हम काम की जगह राम में जीना सीख जाएं, वास्तव में शिव हो जाना ही है।
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शिव की पूजा में सबसे श्रेष्ठ पार्थिव पूजा है इस पूजा से रोग, शोक, पाप और दुखों का नाश होता है। श्रद्धा और समर्पण भाव से शिव की उपासना करने से शिवत्व तो जागृत होता ही है शिव तत्व की प्राप्ति भी होती है। शिव होने का अर्थ है, एक ऐसा जीवन जो मैं और मेरे से ऊपर जिया गया हो। जहां जीवन तो है मगर जीवन के प्रति आशक्ति नहीं और जहां रिश्ते तो हैं मगर किसी के भी प्रति राग और द्वेष नहीं। जहां प्रेम तो है मगर मोह नहीं और जहाँ अपनापन तो है मगर मेरापन नहीं। जहां ऐश्वर्य तो है मगर विलास नहीं और जहां साक्षात मां अन्नपूर्णा है मगर भोग नहीं। जहां नृत्य भी है, संगीत भी है, त्याग भी है और योग भी है मगर अभिमान नहीं।
जीवन की वह स्थिति जब हम विषमता में भी जीना सीख जाएं, जब हम निर्लिप्त रह कर बांटकर खाना सीख जाएं और जब हम काम की जगह राम में जीना सीख जाएं, वास्तव में शिव हो जाना ही है। ज्योतिषाचार्य पं. मनोज कुमार द्विवेदी ने बताया कि भगवान शिव की उपासना करने से समस्त कामनाओं की पूर्ति होती है।
भगवान शिव स्वरूप से विषम जैसे आभासित होने पर भी परम शांत, एक रूप और कृपा सागर कहलाए। अनिष्टकारक दुर्योगों में शिव की सहस्त्रनामावली, रूद्राष्टाध्यायी, दारिद्रयदहन स्त्रोत, महामृत्युंजय मंत्र, षडाक्षर एवं पंचाक्षर का श्रद्वा व विश्वास के साथ पाठ करने से भगवान शिव प्रसन्न हो जाते हैं।
ग्रहजन्य की बाधा दूर हो जाती है और सभी दिव्य सुख मिलते हैं। सौभाग्य प्रदान करने वाले शिव काल के भी काल हैं और महाकाल नियन्ता है। भगवान शिव परम कल्याणकारी हैं और श्रद्धा भाव से जो भी उनके दरबार में आया उसको अपना लेते हैं। भगवान शिव को जल की धारा के साथ ही मन की धारा भी अर्पित करने से समस्त कामनाओं की पूर्ति होती है।