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Kabirdas jayanti 2021: इस दिन है समाज सुधारक संत कबीर दास की जयंती, जानिए उनके जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य

Thu, 24 Jun 2021 06:06 AM IST
Shashi Shashi धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: Shashi Shashi Updated Thu, 24 Jun 2021 06:06 AM IST
सार

कबीर दास भक्ति काल के कवि और समाज सुधारक थे। इन्होंने अपना पूरा जीवन समाज में व्याप्त कुरीतियों और अंधविश्वास को दूर करने में लगा दिया। प्रत्येक वर्ष ज्येष्ठ मास में पूर्णिमा को इनकी जयंती के रूप में मनाया जाता है। इस बार कबीर दास जयंती 24 जून 2021 को मनाई जाएगी।

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sant kabirdas jayanti 2021 date tithi his biography and know tha important things about Kabeerdas
saint kabir das - फोटो : social media

विस्तार

संत कबीर दास भक्तिकाल के एक ऐसे कवि थे जिन्होंने अपना पूरा जीवन समाज में फैली कुरीतियों को दूर करने में लगा दिया। प्रत्येक वर्ष ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा तिथि को संत कबीरदास की जयंती के रुप में मनाया जाता है। इस बार संत कबीरदास की जयंती 24 जून 2021 को मनाई जाएगी। इनके जन्म के विषय में कुछ भी सटीकता से नहीं कहा जाता है लेकिन पुराने साक्ष्यों के अनुसार कबीरदास जी का जन्म काशी में 1398ईं में हुआ था और इनकी मृत्यु 1518ईं में मगहर नामक स्थान पर हुई थी। ये अपने दोहो में धार्मिक पाखंडो का पुरजोर विरोध करते थे। जब कबीर जी का जन्म हुआ था तब समाज में हर तरफ बुराइयां और पाखंड फैला हुआ था। संत कबीर ने अपना पूरा जीवन काल समाज से पाखंड, अंधविश्वास को दूर करने में लगा दिया। संत कबीर के दोहे व्यक्ति को अंधकार से निकालकर सही राह दिखाते हैं। इनके दोहे अत्यंत सरल भाषा में थे। जिसके कारण उन दोहो को जनमानस आसानी से समझ सकते थे। आज भी लोग इनके दोहे गुनगुनाते हैं। तो चलिए कबीर दास जी की जयंती के पावन अवसर पर जानते हैं इनके जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य।

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कबीर

कबीर दास जी के जन्म के विषय में विद्वानों में मतभेद मिलते हैं। कहा जाता है कि इनका जन्म रामानंद गुरु की आशीर्वाद से एक विधवा ब्रह्माणी के गर्भ से हुआ था। कहा जाता है कि लोक-लाज के भय से उसने इन्हें काशी के समक्ष लहरतारा नामक ताल के पास छोड़ दिया था। जिसके बाद उस राह से गुजर रहे लेई और लोइमा नामक जुलाहे ने इनका पालन-पोषण किया। तो वहीं कुछ विद्वानों का मत है कि कबीर जन्म से ही मुस्लिम थे और इन्हें गुरु रामानंद से राम नाम का ज्ञान प्राप्त हुआ था।

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कबीर जी के विषय में कहा जाता है कि ये निरक्षर थे। इनके द्रारा जितने भी दोहो की रचना की गई है वे केवल इनके मुख से बोले गए हैं। इन्होंने अपनी अमृत वाणी से लोगों के मन में व्याप्त भ्रांतियों को दूर किया और धर्म के कट्टरपंथ पर तीखा प्रहार किया था। इन्होंने समाज को सुधारने के लिए कई दोहे कहे जिसके कारण ये समाज सुधारक कहलाए। संत कबीर के नाम से कबीर पंथ नामक समुदाय की स्थापना की गई। आज के समय में भी इस पंथ को लाखों अनुयायी हैं।

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उस समय समाज में एक अंधविश्वास कायम था कि काशी में मृत्यु होने वाले के स्वर्ग की प्राप्ति होती है तो वहीं मगहर में मृत्यु होने पर नरक भोगना पड़ता है। लोगों में फैले इस अधंविश्वास को दूर करने के लिए कबीर जी पूरे जीवन काशी में रहे लेकिन अंत समय मगहर चले गए और मगहर में ही कबीर दास जी की मृत्यु हुई। कबीर जी को मानने वाले लोग हर धर्म से थे, इसलिए जब इनकी मृत्यु हुई तो उनके अंतिन संस्कार को लेकर हिंदू और मुस्लिम दोनों विवाद होने लगा। तभी जब शव से चादर उठाई गई तो वहां पर केवल फूल थे। इन फूलों को लोगों ने आपस में बांट लिया और अपने अनुसार अंतिम संस्कार किया।

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