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Panchak: 14 से 19 मई तक पंचक, भूलकर न करें ये कार्य
Sat, 16 May 2020 10:25 AM IST
विनोद शुक्ला
पं जयगोविंद शास्त्री, ज्योतिषाचार्य
पं जयगोविंद शास्त्री, ज्योतिषाचार्य
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Sat, 16 May 2020 10:25 AM IST
सार
- 14 मई से 19 मई तक रहेगा पंचक
- पंचक में शुभ कार्य करना वर्जित माना जाता है।
- पंचक काल को भदवा भी कहा जाता है।
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panchak: रविवार को शुरू होने वाला पंचक रोग पंचक कहलाता है
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विस्तार
पंचक नक्षत्रों के आरंभ होते ही प्राणियों में एक अलग तरह का छुपा हुआ भय सताने लगता है कि 'पंचक' लग गया है इसमें ये कार्य आरंभ किया जाय या न किया जाय। ये जानने की जिज्ञासा उन सभी को रहती है जो इन दिनों में आवश्यकता वश कार्य आरंभ करने के लिए विवश रहते हैं। मुहूर्त ज्योतिष के महानतमग्रन्थ 'मुहूर्त चिंतामणि' के अनुसार घनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वा भाद्रपद, उत्तरा भाद्रपद तथा रेवती ये नक्षत्र पर जब चन्द्रमा गोचर करते हैं तो उस काल को पंचक काल कहा गया है पूर्व और उत्तर भारत में इसे 'भदवा' भी कहते हैं।
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ऐसा तभी रहता है जब चन्द्र कुंभ और मीन राशि पर गोचर करते हैं। पंचक काल में घास फूस इकठ्ठा करना, लकड़ी आदि ईंधन एकत्रित करना, पलंग बनाना- चारपाई बनाना, छप्पर बनाने जैसा कार्य नहीं करना चाहिए। इससे अग्नि का भय रहता है। इस काल में दक्षिण दिशा की यात्रा भी वर्जित मानी गई है। चन्द्र जब रेवती नक्षत्र गोचर कर रहे हों तो उस समय बनने वाले मकान की छत नहीं डालनी चाहिए, इससे पारिवारिक कलह, बड़े सदस्य का स्वास्थ्य खराब रहने तथा धन हानि की संभावना अधिक रहती है।
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पंचक के प्रकार और मृत्यु
गरुण पुराण के अनुसार इन पंचक नक्षत्रों के काल में किसी भी सदस्य की मृत्यु हो जाय और उस दिन शनिवार हो तो यह 'मृत्यु पंचक' कहलाता है। इसमें परिवार के सगे सम्बन्धियों में से पाँच सदस्यों की मृत्यु होती है ऐसा देखा भी गया है। इस काल में शव का भी अंतिम संस्कार करने से पहले किसी ज्योतिषी अथवा कर्मकांडी विद्वान की सलाह अवश्य लेनी चाहिए। यदि ऐसा न हो पाए तो शव के साथ जौ अथवा गेहूं आँटे को पंचामृत से गूंथ करके पाँच पुतले या 'कुश' से बनाकर अर्थी पर रखना चाहिए और इन पांचों का भी शव की तरह पूर्ण विधि-विधान से अंतिम संस्कार करना चाहिए, तो पंचक दोष समाप्त हो जाता है। पंचक में आने वाला उत्तराभाद्रपद नक्षत्र वार के साथ मिलकर सर्वार्थसिद्धि योग बनाता है, वहीं धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वा भाद्रपद व रेवती नक्षत्र यात्रा, व्यापार, मुंडन आदि शुभ कार्यों में श्रेष्ठ माने गए हैं।
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रोग पंचक
रविवार को शुरू होने वाला पंचक रोग पंचक कहलाता है, इसके प्रभाव से ये पांच दिन शारीरिक और मानसिक परेशानियों वाले होते हैं। इस पंचक में किसी भी तरह के शुभ कार्य आरंभ करने से बचना चाहिए। हर तरह के मांगलिक कार्यों में ये पंचक अशुभ माना गया है।
राज पंचक
सोमवार को शुरू होने वाला पंचक राज पंचक कहलाता है ये पंचक शुभ माना जाता है। इसके प्रभाव से इन पांच दिनों में सरकारी कामों में सफलता मिलती है संपत्ति से जुड़े काम करना भी शुभ रहता है।
अग्नि पंचक
मंगलवार को शुरू होने वाला पंचक अग्नि पंचक कहलाता है। इन पांच दिनों में कोर्ट कचहरी और विवाद आदि के फैसले, अपना हक प्राप्त करने वाले काम किए जा सकते हैं। इस पंचक में किसी भी तरह का निर्माण कार्य और मशीनरी कामों की शुरुआत करना अशुभ माना गया है।
चोर पंचक
शुक्रवार को शुरू होने वाला पंचक चोर पंचक कहलाता है। इस पंचक में लेन-देन, व्यापार और किसी भी तरह के लेन-देन से बचना चाहिए।
बुधवार और गुरुवार को शुरू होने वाले पंचक सभी तरह के कार्य कर सकते हैं यहाँ तक कि सगाई, विवाह आदि शुभ कार्य भी किए जाते हैं।
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गरुण पुराण के अनुसार इन पंचक नक्षत्रों के काल में किसी भी सदस्य की मृत्यु हो जाय और उस दिन शनिवार हो तो यह 'मृत्यु पंचक' कहलाता है। इसमें परिवार के सगे सम्बन्धियों में से पाँच सदस्यों की मृत्यु होती है ऐसा देखा भी गया है। इस काल में शव का भी अंतिम संस्कार करने से पहले किसी ज्योतिषी अथवा कर्मकांडी विद्वान की सलाह अवश्य लेनी चाहिए। यदि ऐसा न हो पाए तो शव के साथ जौ अथवा गेहूं आँटे को पंचामृत से गूंथ करके पाँच पुतले या 'कुश' से बनाकर अर्थी पर रखना चाहिए और इन पांचों का भी शव की तरह पूर्ण विधि-विधान से अंतिम संस्कार करना चाहिए, तो पंचक दोष समाप्त हो जाता है। पंचक में आने वाला उत्तराभाद्रपद नक्षत्र वार के साथ मिलकर सर्वार्थसिद्धि योग बनाता है, वहीं धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वा भाद्रपद व रेवती नक्षत्र यात्रा, व्यापार, मुंडन आदि शुभ कार्यों में श्रेष्ठ माने गए हैं।
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अग्नि पंचक
मंगलवार को शुरू होने वाला पंचक अग्नि पंचक कहलाता है। इन पांच दिनों में कोर्ट कचहरी और विवाद आदि के फैसले, अपना हक प्राप्त करने वाले काम किए जा सकते हैं। इस पंचक में किसी भी तरह का निर्माण कार्य और मशीनरी कामों की शुरुआत करना अशुभ माना गया है।
चोर पंचक
शुक्रवार को शुरू होने वाला पंचक चोर पंचक कहलाता है। इस पंचक में लेन-देन, व्यापार और किसी भी तरह के लेन-देन से बचना चाहिए।
बुधवार और गुरुवार को शुरू होने वाले पंचक सभी तरह के कार्य कर सकते हैं यहाँ तक कि सगाई, विवाह आदि शुभ कार्य भी किए जाते हैं।