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क्या होता है सूर्य के उत्तरायण और दक्षिणायन का अर्थ?

Wed, 06 May 2020 04:18 PM IST
विनोद शुक्ला ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला Published by: विनोद शुक्ला Updated Wed, 06 May 2020 04:18 PM IST
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सूर्य का उत्तरायण और दक्षिणायन
Importance Of Uttarayan and Dakshinayan In Astrology: अयन का अर्थ होता है परिवर्तन। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार एक वर्ष में दो अयन होते हैं। साल में दो बार सूर्य की स्थिति में परिवर्तन होता है। सूर्य 6 महीने उत्तरायण और 6 महीने दक्षिणायन में रहता है। आइए जानते हैं सूर्य के उत्तरायण और दक्षिणायन के बारे में विस्तार से...
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उत्तरायण और दक्षिणायन 
हिंदू पंचांग के अनुसार जब सूर्य मकर से मिथुन राशि तक भ्रमण करता है, तो इस अंतराल को उत्तरायण कहते हैं। सूर्य के उत्तरायण की यह अवधि 6 माह की होती है। वहीं जब सूर्य कर्क राशि से धनु राशि तक भ्रमण करता है तब इस समय को दक्षिणायन कहते हैं। दक्षिणायन को नकारात्मकता का और उत्तरायण को सकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है। सौरमास का आरम्भ सूर्य संक्रांति से होता है। सूर्य की एक संक्रांति से दूसरी संक्रांति को सौरमास कहते हैं।
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उत्तरायण | Uttarayan
- उत्तरायण मास को देवी- देवताओं का दिन माना गया है।
- उत्तरायण के 6 महीनों के दौरान नए कार्य जैसे- गृह प्रवेश , यज्ञ, व्रत, अनुष्ठान, विवाह, मुंडन आदि जैसे कार्य करना शुभ माना जाता है।
- उत्तरायण के समय दिन लंबा और रात छोटी होती है।
- उत्तरायण में तीर्थयात्रा, धामों के दर्शन और उत्सवों का समय होता है।
-  उत्तराणण के दौरान तीन ऋतुएं होती है-  शिशिर, बसन्त और ग्रीष्म

दक्षिणायन | Dakshinayan
- मान्यताओं के अनुसार दक्षिणायन का काल देवताओं की रात्रि मानी गई है।
- दक्षिणायन के समय में रातें लंबी हो जाती हैं और दिन छोटे होने लगते हैं।
- अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार 21/22 जून से दक्षिणायन आरंभ होता है।
- ज्योतिष शास्त्र के अनुसार दक्षिणायन होने पर सूर्य दक्षिण की ओर झुकाव के साथ गति करता है।
- दक्षिणायन में विवाह, मुंडन, उपनयन आदि विशेष शुभ कार्य निषेध माने जाते हैं।
- दक्षिणायन के दौरान वर्षा, शरद और हेमंत, ये तीन ऋतुएं होती हैं।
- तामसिक प्रयोगों के लिए दक्षिणायन का समय उपयुक्त होता है।
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