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नवरात्रि कलश स्थापना, मंत्र और पूजन विधि
Sat, 28 Sep 2019 03:44 PM IST
विनोद शुक्ला
पं. जयगोविंद शास्त्री
पं. जयगोविंद शास्त्री
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Sat, 28 Sep 2019 03:44 PM IST
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navratri 2019
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नवरात्रि में नव का अर्थ है नया और रात्रि का अर्थ है यज्ञ-अनुष्ठान, अर्थात नया अनुष्ठान। शक्ति के नौ रूपों की आराधना नौ अलग-अलग दिनों में करने के क्रम को ही नवरात्रि कहते है। जो जीवात्मा, भूताकाश, चित्ताकाश और चिदाकाश में सर्वव्यापी है वही मां ब्रह्मशक्ति है।
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कलश स्थापना की विधि
इस दिन भक्तगण मां की पूजा के लिए सुबह स्नान आदि से निवृत्त होकर कलश, नारियल-चुन्नी, श्रृंगार का सामान, अक्षत, हल्दी, फल-फूल पुष्प आदि यथा संभव सामग्री साथ रख लें। कलश सोना, चांदी, तामा, पीतल या मिट्टी का होना चाहिए। लोहे अथवा स्टील के कलश का पूजा में प्रयोग नहीं करना चाहिए।
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कलश के ऊपर रोली से ॐ और स्वास्तिक बनाएं। पूजा आरम्भ के समय ॐ पुण्डरीकाक्षाय नमः कहते हुए कुशा से अपने ऊपर जल छिडकें। अपने पूजा स्थल से दक्षिण और पूर्व के कोने में घी का दीपक जलाते हुए ॐ दीपो ज्योतिः परब्रह्म दीपो ज्योतिर्र जनार्दनः दीपो हरतु में पापं पूजा दीप नमोस्तु ते मंत्र पढते हुए दीप प्रज्ज्वलित करें।
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मूर्ति किस दिशा में रखें
मां दुर्गा की मूर्ति के बाईं तरफ श्री गणेश की मूर्ति रखें। पूजा स्थल के उत्तर-पूर्व भाग में पृथ्वी पर सात प्रकार के अनाज नदी की रेत रखते हुए ॐ भूम्यै नमः कहते हुए डालें। इसके उपरांत कलश में जल-गंगाजल, लौंग, इलायची, पान, सुपारी, रोली, मोली, चन्दन, अक्षत, हल्दी, रुपया पुष्पादि डालें। अब कलश में थोड़ा और जल-गंगाजल डालते हुए ॐ वरुणाय नमः मंत्र पढ़ें और कलश को पूर्ण रूप से भर दें। इसके बाद आम की टहनी डालें, यदि आम की टहनी न हो तो पीपल, बरगद, गूलर अथवा पाकर का पल्लव भी कलश के ऊपर रखने का विधान है। जौ अथवा कच्चा चावल कटोरे मे भरकर कलश के ऊपर रखें उसके ऊपर चुन्नी से लिपटा हुआ नारियल रखकर कलश को माथे के समीप लाएं और वरुण देवता को प्रणाम करते हुए रेत पर कलश स्थापित करें।
समर्पण भाव रखें
पूजा से पहले इस बात का ध्यान अवश्य रखें कि आराधना के लिए श्रद्धा- विश्वास और समर्पण का होना अतिआवश्यक है। पुष्प लेकर मन में ही संकल्प लें कि मां मैं आज नवरात्रि की प्रतिपदा से आप की आराधना कर रहा हूं, मेरी पूजा स्वीकार करके सभी कार्यों को सिद्ध करो।
मंत्रोच्चार
पूजा के समय यदि आप को कोई भी मंत्र नही आता हो तो केवल दुर्गा सप्तशती में दिए गए नवार्ण मंत्र ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुंडायै विच्चे से सभी पूजन सामग्री चढाएं। मां शक्ति का यह मंत्र अमोघ है। आप के पास जो भी यथा संभव सामग्री हो उसी से आराधना करें जितना भी संभव हो श्रृंगार का सामान और नारियल-चुन्नी जरुर चढ़ाएं। सर्व प्रथम मां का ध्यान, आवाहन, आसन, अर्घ्य, स्नान, उपवस्त्र, वस्त्र,श्रृंगार का सामन, सिन्दूर, हल्दी, अक्षत, पुष्प, धूप, दीप, मिष्ठान, रितुफल, नारियल आदि जो भी सुलभ हो उसे अर्पित करें। पूजन के पश्च्यात आरती और क्षमा प्रार्थना अवश्य करें। भक्ति में शक्ति हो तो शक्ति हमेशा प्रसन्न रहती हैं।
हर वर्ग के लिए अलग अलग मंत्रोच्चार
विद्यार्थी वर्ग ॐ ऐं ह्रीं क्लीं महासरस्वती देव्यै नमः मंत्र पढ़ते हुए माता शक्ति कि पूजा करें। जिन आराधकों के घर में अशांति हो उन्हें या देवि सर्वभूतेषु शान्ति रूपेण संस्थिता नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः मंत्र का जाप करना चाहिए। इस मंत्र को जपने से सुख-शान्ति मिलती है। जो लोग कर्ज में डूबे हुए हैं वे या देवि सर्वभूतेषु लक्ष्मी रूपेण संस्थिता नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः मंत्र से मां की पूजा करें। इन सबके अतिरिक्त अगर संभव हो तो कुंजिका स्तोत्र और देव्य अथर्वशीर्ष का पाठ करें।
विवाह के लिए मंत्रोच्चार
अविवाहित पुरुष विवाह हेतु पत्नी मनोरमां देहि मनो वृत्तानु सारिणीम तारिणीम दुर्ग संसार सागरस्य कुलोद्भवाम मंत्र का जप और पूजन करके मनोनुकूल जीवन साथी पा सकते हैं। कुंवारी कन्याओं जिनके विवाह में बाधा आ रही हों वे ॐ कात्यायनि महामाये महायोगिन्यधीश्वरी नन्द गोपसुतं देवि पतिं मे कुरु ते नमः का जाप करें। इस सिद्ध मंत्र से विवाह दोष से मुक्ति मिल जाती है। अधिक धन प्राप्ति के लिए प्रतिदिन दशांग, गूगल और शहद मिश्रित हवन सामग्री से हवन करें।