Navratri 2020: उत्तराखंड और हिमाचल में गिरे थे माता सती के नयन, जानें दोनों शक्तिपीठों के बारे में
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा के मंदिरो में दर्शन के लिए भक्तों का तांता लग जाता है। नवरात्रि के दिनों में मां के 51 शक्तिपीठों का महत्व बहुत बढ़ जाता है। जब माता सती ने अपने पिता दक्ष के द्वारा शिव जी का अपमान किए जाने के कारण यज्ञकुंड में अपने प्राणों का त्याग कर दिया । तब दुखी होकर भगवान शिव माता सती के शरीर को लेकर तांडव करने लगे। जिससे सभी देवता गणों को सृष्टि की चिंता होने लगी। तब भगवान श्री हरि विष्णु ने शिव जी का मोह भंग करने के लिए अपने सुदर्शन चक्र से माता सती के शरीर को कई हिस्सों में विभाजित कर दिया। जिन स्थानों पर माता सती के शरीर के भाग और आभूषण गिरे वहां पर शक्तिपीठ बन गए। इस तरह से कुल मिलाकर 51 शक्तिपीठों का उल्लेख मिलता है। इन शक्ति पीठों के दर्शन से ही भक्तों के सारे कष्ट दूर हो जाते हैं। उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर में मां के नयना या नैना देवीशक्ति पीठ स्थापित हैं यहां पर माता सती के नयन गिरे थे।
नैना देवी हिंदू धर्म के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक है। यहां पर मां की नैनों की पिंडी स्वरुप में पूजा की जाती है। कहते हैं कि यहां पर दर्शन करने से नैनों (आंखों) से संबंधित रोग दूर हो जाते हैं। जो भी पर्यटक नैनीताल घूमने जाते हैं वे मां नैना दैवी के दर्शन अवश्य करते हैं। यहां उपस्थित नैनी झील को भी बहुत पवित्र माना जाता है। मान्यता है कि इस झील में स्नान करने से मानसरोवर में स्नान करने के समान पुण्य की प्राप्ति होती है। नैनी झील के कारण ही नैनीताल का नाम पड़ा। मंदिर के बाहर लगे फूलों की सुंदरता मन को मोह लेती है। मां नैना देवी को नंदा देवी भी कहा जाता है।
मां का दूसरा नयन हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर में गिरा था। यहां पर भी मां नैना देवी का मंदिर बना हुआ है। नौं देवीयों में नयना देवी का छठां स्थान है। यहां पर उपस्थित पीपल का वृक्ष भक्तों के लिए आकर्षण का केंद्र है। यह वृक्ष अति प्राचीनतम है। मंदिर के द्वार पर दांयी तरफ गणपति भगवान और हनुमान जी की प्रतिमा है। मंदिर के मुख्य द्वार के भीतर जाने के बाद दो सिहं बने हुए हैं। गर्भ गृह में दांयी ओर मां काली, मध्य में मां नयना देवी और बांयी ओर गणपति देव की प्रतिमा स्थापित है। मंदिर के पास ही एक गुफा है जिसे नयना देवी की गुफा कहा जाता है। मंदिर से कुछ दूरी पर एक पवित्र तालाब भी बना हुआ है। मंदिर तक पहुंचने के लिए पैदल यात्रा की जाती है साथी प्रशासन के द्वारा उड्डनखटोला का प्रबंध भी है। आप इसके द्वारा आसानी से मंदिर तक पहुंच सकते हैं।