फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Spirituality ›   Religion ›   Krishna Janmashtami 2022 Short Story of Birth of Lord Krishna Know How Vasudev Saved Him

Krishna Janmashtami 2022 : भगवान कृष्ण की जन्म कथा, जानिए वासुदेव ने कृष्ण के जीवन को कैसे बचाया ?

Wed, 17 Aug 2022 12:46 PM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: विनोद शुक्ला Updated Wed, 17 Aug 2022 12:46 PM IST
सार

भाद्रपद मास,अष्ठमी तिथि,रात के 12 बजे और रोहिणी नक्षण। उस समय कंस के सभी प्रहरी गहरी निद्रा में सो गए। धरती पर केवल वसुदेव और देवकी ही जाग रहे थे,चंद्रमा भी बादलों की ओट से भगवान के अवतार के कृष्ण को निहार रहे थे।

विज्ञापन
Krishna Janmashtami 2022 Short Story of Birth of Lord Krishna Know How Vasudev Saved Him
krishna janmashtami - फोटो : Social media

विस्तार

Krishna Janmashtami Story : देवकी के आठवें प्रसव का वक्त जैसे जैसे करीब आ रहा था,कंस की जेल में नियुक्त प्रहरी ही नहीं,आसपास के वातावरण में भी मलीनता कम होने लगी थी। उधर,देवकी तो पहले से ही काफी सुंदर थी,लेकिन इस गर्भ के आखिर में उनका रूप इस कदर निखर गया था कि उनके चेहरे से नजर नहीं हटती थी। श्रीमदभागवत में देवकी के इस रूप का विस्तार से वर्णन किया गया है। आखिर वह दिव्य समय आ ही गया भाद्रपद मास,अष्ठमी तिथि,रात के 12 बजे और रोहिणी नक्षण। उस समय कंस के सभी प्रहरी गहरी निद्रा में सो गए। धरती पर केवल वसुदेव और देवकी ही जाग रहे थे,चंद्रमा भी बादलों की ओट से भगवान के अवतार के कृष्ण को निहार रहे थे।

विज्ञापन


वहीं देवगण आसमान में फूल बरसाने लगे। इतने में भगवान चतुर्भूज रूप में देवकी के सामने अवतरित हो गए। भगवान के इस रूप को देखकर पहले तो देवकी और वसुदेव ने भगवान का पूजन किया,लेकिन देवकी ने कहा कि हे भगवान आपका यह रूप पूजा के योग्य है, इसे मैं अपना बच्चा कैसे मान सकती हूं। देवकी के इस आग्रह पर भगवान बाल रूप में आ गए। 
विज्ञापन


नंद बाबा के घर पहुंचा कर वसुदेव ने की कृष्ण की रक्षा
भगवान के चतुर्भूज रूप को देखकर जब देवकी ने बालरूप में आने का आग्रह किया तो भगवान ने कहा था कि इस रूप में तो वह पूरे समाज की रक्षा कर सकते हैं, लेकिन बालरूप में वह अपनी भी सुरक्षा नहीं कर सकते। यह सुनकर देवकी वसुदेव चिंता में पड़ गए। लेकिन भगवान ने उन्हें बताया कि वह चाहें तो उन्हें तत्काल गोकुल में नंदबाबा के घर पहुंचा सकते हैं। ठीक इसी समय नंदबाबा को एक बेटी हुई, उस बेटी को अपने साथ यहां ले आए। भगवान की ही प्रेरणा से वसुदेव ने भगवान को गोकुल पहुंचा दिया और वहां से यसोदा की बेटी को अपने साथ ले आए। वह जैसे ही इस बेटी को लेकर कारागार में पहुंचे, सबकुछ सामान्य हो गया। देवकी वसुदेव को बेड़ियां लग गई, प्रहरी जाग गए। इतने में बच्ची ने रोना भी शुरू कर दिया। उसका रोना सुनकर प्रहरियों ने कंस को सूचना दी। कंस भी इसी पल का इंतजार कर रहा था, वह दौड़े दौड़े आया और देवकी के हाथ से बच्ची को छीन कर पत्थर पर पटक दिया। लेकिन वह बच्ची उसके हाथ से निकल कर यह कहते हुए अंर्तध्यान हो गई कि देवकी का आठवां पुत्र कहीं और जन्म ले चुका है।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें आस्था समाचार से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। आस्था जगत की अन्य खबरें जैसे पॉज़िटिव लाइफ़ फैक्ट्स,स्वास्थ्य संबंधी सभी धर्म और त्योहार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed