फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Spirituality ›   Religion ›   krishna janmashtami 2020 in hindi know importance and nidhivan secret of vridavan

Janmashtami 2020: रहस्यों से भरा है निधिवन, यहीं से प्रगट हुई थी बांके बिहारी की मूर्ति

Sun, 09 Aug 2020 07:20 AM IST
विनोद शुक्ला अनीता जैन
अनीता जैन Published by: विनोद शुक्ला Updated Sun, 09 Aug 2020 07:20 AM IST
विज्ञापन
krishna janmashtami 2020 in hindi know importance and nidhivan secret of vridavan
Janmashtami - फोटो : अमर उजाला- फाइल फोटो

मधुवन में राधिका नाची रे,गिरधर की मुरलिया बाजी रे। जी हाँ,भगवान श्री कृष्ण की लीला नगरी वृन्दावन में श्रीकृष्ण की आज भी मुरली बजती है और राधारानी गोपियों संग नृत्य करती हैं। ये सुनकर आपको अटपटा जरूर लगेगा पर वृन्दावन धाम के चमत्कारी निधिवन में  ऐसे कई गहरे रहस्य छुपे हुए हैं जिनको समझ पाना हर किसी के लिए मुश्किल ही नहीं नामुमकिन भी है। उत्तर प्रदेश राज्य में मथुरा जिले से करीब 15 किलोमीटर दूर बसे यमुना जी के निकट वृंदावन धाम के निधिवन को राधा-कृष्ण के रास के लिए जाना जाता है। इस अद्भुत वन वाटिका को लोग निधिवन और मधुवन के नाम से जानते हैं। यह वन बड़ा ही अद्बभुत व रहस्यमयी है जिसके बारे में माना जाता है कि यहां आज भी हर रात राधा-कृष्ण गोपियों संग रास रचाने के लिए आते हैं। दर्शनार्थियों से लेकर हर किसी के लिए इस वन को शाम होते ही बंद कर दिया जाता है और फिर यहां कोई नहीं रहता।

विज्ञापन

गोपियों का रूप हैं आपस में गुथी हुई लताएं

लगभग दो एकड़ क्षेत्रफल में फैले निधिवन के वृक्षों की विशेषता यह है कि इनमें से किसी भी वृक्ष के तने सीधे नहीं मिलेंगे तथा इन वृक्षों की डालियां नीचे की ओर झुकी तथा आपस में गुंथी हुई प्रतीत होती  हैं। वृन्दावन की रज में उगे हुए ये पेड़ हमेशा हरे रहते हैं। आम तौर पर पेड़ की शाखाएं ऊपर की ओर बढ़ती हैं लेकिन यहां पेड़ों की शाखाएं नीचे की और बढ़ती हैं। ऐसी मान्यता है कि निधिवन की सारी लताएं गोपियों का रूप हैं। जो दिन में एक दूसरे की  बाहों में बाहें डाले खड़ी रहती हैं। लेकिन जब अर्द्धरात्रि के समय निधिवन में राधारानी जी, कान्हा जी के साथ रास लीला करती हैं तो ये लताएं गोपियां बन जाती है।ऐसी भी मान्यता है कि जो कोई भी यहां से किसी वृक्ष के पत्ते को लेकर गया है उसके साथ कुछ ना कुछ अहित होता है।
 
विज्ञापन
विज्ञापन

रात में नहीं रुकता है कोई

वृंदावन में सबसे ज्यादा बंदर कही है तो इसी निधिवन में ही हैं। दिनभर यहाँ बंदरों की उछल-कूद देखी जा सकती है। लेकिन यह बात हैरान करती है कि शाम होते ही बंदर यहां से कुदरती चले जाते है। उसके बाद बिल्कुल भी नजर नहीं आते। बंदर ही नहीं अपितु कोई भी जीव जंतु जैसे मोर,पक्षी आदि भी यहां शाम होने के बाद नज़र नहीं आते। स्थानीय लोगों का दावा है कि यह सदियों से होता चला आया है। रात में रुकने की यहां सख्त मनाही है। वृंदावन के स्थानीय पुजारी के मुताबिक जिस किसी भक्त या साधु,सन्यासी ने यहाँ रात में रुकने की कोशिश की है,वह पागल,उन्मादी या अंधा हो जाता हैऔर एक-दो दिन बाद उसकी मृत्यु हो जाती है।
 
विज्ञापन

असीमित ऊर्जा के कारण होता है ऐसा

यहां के साधु-संत एवं पुजारियों का ऐसा मानना है कि परमेश्वर श्री कृष्ण के दर्शन उस अमुक व्यक्ति को जरूर प्राप्त हो जाते हैं लेकिन वह भगवान की अपार ऊर्जा को देखकर सहन नहीं कर पाता। या तो उसकी आंखों की रोशनी चली जाती है या उसकी मृत्यु हो जाती है। स्थानीय लोगों और पुजारियों के मुताबिक उनकी मौत भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन के बाद ही होती होगी। यही वजह है कि उन सभी लोगों की समाधि इसी वन में आज भी मौजूद है।

यहां के साधु-संतों और बृज के लोगों का मानना है कि इस अलौकिक निधिवन में भगवान श्रीकृष्ण एवं राधा रानी आज भी मध्य रात्रि में गोपियों संग रास रचाते हैं। रासलीला के बाद निधिवन परिसर में स्थापित रंग महल में शयन करते हैं। रंग महल में राधा और रास रचइया श्री कृष्ण के लिए रखे गए चंदन के पलंग को शाम सात बजे के पहले ही पूरी तरह सजा दिया जाता है पलंग पर मखमल की सुंदर सुगंधित चादर बिछाई जाती है साथ में तकिये और मसनद भी लगाए जाते हैं । पलंग के ही बगल में एक लोटा पानी, राधाजी के सोलह श्रृंगार का सामान ,दातुन और मीठा पान रख दिया जाता है। भोग के लिए लड्डू और माखन मिश्री का प्रसाद रखा जाता है । सुबह पांच बजे जब रंग महल का जब दरवाजा खुलता है तो बिस्तरों पर सलवटें मिलती हैं,ऐसा लगता है जैसे कोई यहाँ सोकर गया है। लोटे का जल जो शाम को पुजारियों द्वारा भगवान के लिए भरा जाता है, खाली होता है एवं दातुन कुची हुई नजर आती है और पान चवाया हुआ मिलता है। रंगमहल में भक्त केवल श्रृंगार का सामान ही चढ़ाते है और प्रसाद के स्वरुप उन्हें भी श्रृंगार का सामान मिलता है। मान्यता है कि जो कोई भी भक्त यहाँ श्रद्धा से राधा-कृष्ण के दर्शन करता है,भगवान उसकी मनोकामना को अवश्य पूरा करते हैं।  

विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें आस्था समाचार से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। आस्था जगत की अन्य खबरें जैसे पॉज़िटिव लाइफ़ फैक्ट्स,स्वास्थ्य संबंधी सभी धर्म और त्योहार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed