फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Spirituality ›   Religion ›   know the benefits of havan yagya according to Dr.Pranav Pandya

धर्म ही नहीं अच्छी सेहत के लिए भी किया जाता है यज्ञ, जानिए इसके फायदे

Sat, 27 Oct 2018 01:58 PM IST
डॉ. प्रणव पण्ड्या
डॉ. प्रणव पण्ड्या Updated Sat, 27 Oct 2018 01:58 PM IST
विज्ञापन
know the benefits of havan yagya according to Dr.Pranav Pandya
यज्ञ का महत्व

यज्ञ की गरिमा कायम करने के लिए वर्षों से अध्ययन और अनुसंधान के जो प्रयत्न किए जा रहे हैं, उनके निष्कर्ष विलक्षण हैं। इस दिशा में रोगों के उपचार के नतीजों से प्रभावित और प्रेरित होकर यज्ञोपैथी के नाम से एक नई चिकित्सा पद्धति या किसी समय प्रचलित यज्ञ चिकित्सा का नया उन्मेष ही हो रहा है। आयुर्वेद और शास्त्रों में जिस रोग की जो औषधियां बताई गई हैं, उन्हें लेने के साथ ही समिधाओं के साथ नियमित रूप से हवन भी किया जाता रहे, तो कम समय में अधिक लाभ मिलता है।

विज्ञापन


यज्ञ का महत्व
यज्ञ चिकित्सा का मूल सिद्धांत यह है कि स्थूल के बजाय सूक्ष्म होती हुई वस्तुएं या औषधियां ज्यादा असरदार होती जाती हैं। विशिष्ट मंत्रों के साथ जब औषधि युक्त सामग्री से हवन किया जाता है, तो वह हवन का धुआं रोम छिद्रों और नासिका से शरीर में प्रवेश करता है और रोग की जड़ें कटने लगती हैं। आरोग्य होने के लिए जो यज्ञ किए जाते हैं, उन्हें ‘भैषा यज्ञ’ कहते हैं। यज्ञ के संचालक विद्वान मर्मज्ञ ब्रह्मा होते थे। ब्रह्मा अर्थात कोई चार मुंह वाले विष्णु की नाभि से निकले कमल पर बैठे देवसत्ता नहीं। ब्रह्मा से आशय उस विद्वान मनीषी से है, जो यज्ञ विधि का सूक्ष्म परीक्षण कर जान लेते थे कि वायु और आकाश में क्या विकार आ रहा है, उससे कौन से रोग फैल सकते हैं, उसके लिए किन वनौषधियों के हवन का आयोजन होता है?
विज्ञापन


यज्ञ से सेहत में होता है सुधार
रोगी के शरीर में कौन-सी व्याधि बढ़ी हुई है, कौन से तत्व घट बढ़ गए हैं? उनकी पूर्ति और शरीर के संतुलन को साधने के लिए किन औषधियों की आहुति दी जानी चाहिए? इस तरह के विवेक विवेचन से आहुतियां दिलाकर हवन कराया जाता था। भावप्रकाश, निघंटु एवं अन्य आयुर्वेद ग्रंथों में यज्ञ-चिकित्सा में प्रयुक्त होने वाली जिन औषधियों को प्रमुखता दी गई है, उनमें अगर, तगर, गुग्गुल, ब्राह्मी,  बड़ी इलायची, पुनर्नवा, नागकेसर, चंदन, कपूर, देवदार और मोथा आदि मुख्य हैं। सभी औषधियां समान मात्रा में ली जाती हैं। इन्हें कूट-पीसकर इनके दसवें भाग के बराबर शक्कर और उतना ही घी मिलाकर हवन करने से शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य में लाभ मिलता है। वैज्ञानिक परीक्षणों द्वारा भी अब यह सिद्ध हो चुका है। आवश्यकतानुसार दिन में तीन बार और रात को एक-दो बार किसी पात्र में अग्नि रखकर थोड़ी-सी औषधीय हवन सामग्री थोड़ी देर के लिए रोगी के निकट धूप की भांति जलाई जा सकती है। हवन करते समय तैयार औषधियों में दसवां भाग शर्करा एवं दसवां भाग घृत मिला लेना चाहिए। कोई औषधि या वस्तु अधिक महंगी हो अथवा अनुपलब्ध हो, तो उसकी पूर्ति अन्य दूसरी औषधियों की मात्रा बढ़ाकर की जा सकती है।
विज्ञापन
विज्ञापन


यज्ञ में गायत्री मंत्र का महत्व
शास्त्रों में सूर्य को स्वास्थ्य का केंद्र माना गया है। सूर्य में रोग-निवारण की अद्भुत शक्ति है। निरोगता, बलिष्ठता एवं दीर्घायु के लिए 'श्री सूर्य गायत्री' का जाप भी किया जा सकता है। गहन वैज्ञानिक अध्ययन-अनुसंधानों के आधार पर पाया गया है कि जो औषधियां आयुर्वेद में जिन रोगों के लिए गुणकारी मानी गई हैं, उन्हें हवन सामग्री के रूप में घृत और शक्कर मिलाकर 'श्री सूर्य गायत्री' मंत्र के साथ रोगी के निकट हवन करने से रोगी को अधिक लाभ मिलता है। यज्ञोपचार प्रक्रिया में रोगानुसार गायत्री महामंत्र तथा उससे संबंधित चौबीस गायत्री मंत्रों द्वारा हवन किया जाता है। यज्ञ चिकित्सा करते समय उन्हीं औषधियों को चूर्ण के रूप में सुबह-शाम एक चम्मच लेने से लाभ मिलता है। हवन के बाद पास रखे जल में दूर्वा, कुश अथवा पुष्प डुबोकर गायत्री मंत्र पढ़ते हुए रोगी पर अभिसिंचन करना चाहिए। साथ ही यज्ञ की भस्म मस्तक, हृदय, कंठ, पेट नाभि एवं दोनों भुजाओं पर लगानी चाहिए। इसी प्रकार घृतपात्र में जो घृत बचा रहता है, उसमें से कुछ बूंदें लेकर रोगी के मस्तक एवं हृदय पर लगाना चाहिए। सामान्यतः देखा गया है कि इन प्रयोगों से रोगी को लाभ मिलता है। इसका प्रभाव रोगी के शारीरिक एवं मानसिक दोनों ही क्षेत्रों में पड़ता है।


 
विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें आस्था समाचार से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। आस्था जगत की अन्य खबरें जैसे पॉज़िटिव लाइफ़ फैक्ट्स,स्वास्थ्य संबंधी सभी धर्म और त्योहार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed