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आस्था : देश के ऐसे 5 मंदिर जहां पर पुरुषों का जाना होता है वर्जित...

Mon, 06 Feb 2023 03:20 PM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: विनोद शुक्ला Updated Mon, 06 Feb 2023 03:20 PM IST
सार

देश में कुछ स्थानों पर ऐसे मंदिर हैं जहां पर पुरुषों का जाना वर्जित होता है।  

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know interesting facts about temples in india where men are not allowed
देश के कुछ स्थानों पर ऐसे मंदिर हैं जहां पर कुछ समय के लिए पुुरुषों का प्रवेश वर्जित होता है।

विस्तार

भारत के हर एक क्षेत्र में कोई न कोई ऐसा मंदिर जरूर होगा जिसमें आस्था से जुड़ी हुई कई कहानियां और रहस्य छिपे हुए होंगे। हिंदू धर्म में मंदिर जाकर देवी-देवताओं के दर्शन करना, पूजा-पाठ करना और भगवान का आशीर्वाद प्राप्त करके सुख, शांति और मोक्ष की प्राप्ति की जाती हैं। देश के प्रमुख मंदिरों मे जाकर लोगों को शांति और सुकून का अनुभव प्राप्त होता है। देश के हर एक हिस्से में तरह-तरह के मंदिर है जहां के नियम और कायदे भी एक दूसरे से अलग होते हैं। भारत में कुछ ऐसे मंदिर हैं जहां पर पुरुषों का जाना वर्जित होता है। केवल महिलाएं ही कुछ खास नियमों का पालन करते हुए मंदिर में प्रवेश कर सकती हैं। आइए जानते हैं देश में कौन-कौन से प्रसिद्ध मंदिरों में पुरुषों के जाने पर पाबंदियां हैं। 
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1- कुमारी अम्मन मंदिर, कन्याकुमारी
दक्षिण भारत में कई ऐसे मंदिर है जो अपनी स्थापत्य कला और शैली के लिए विश्व प्रसिद्ध है। दक्षिण भारत के कन्याकुमारी में मौजूद कुमारी अम्मन का मंदिर ऐसा है जहां पर केवल ब्रह्राचारी पुरुष को ही मंदिर के द्वार तक जाने की अनुमति होती है। वहीं विवाहित पुरुष इस मंदिर के परिसर में प्रवेश नहीं कर सकते हैं। इस मंदिर के गर्भगृह में मां दुर्गा की मूर्ति स्थापित है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ऐसी मान्यता है यह वही मंदिर है जहां पर माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप पाने के लिए कठोर तपस्या की थी। कुमारी अम्मन मंदिर में मां भगवती की पूजा का अधिकार केवल महिलाओं का ही है।  
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2- कामाख्या मंदिर,असम
असम में स्थित कामाख्या मंदिर एक शक्तिपीठ है। इस मंदिर की गिनती देश के प्रमुख मंदिरों में होती है। देश का यह शक्तिपीठ एक मात्र ऐसा मंदिर है जहां पर पुरुषों को साल के कुछ निश्चित समय में मंदिर में प्रवेश करने की अनुमति नहीं है। असम के गुवाहाटी के नीलांचल की पहाड़ियों के बीच स्थित यह शक्ति पीठ मंदिर में हर साल भव्य अंबुबाची मेले का आयोजन किया जाता है। अंबुबाची मेले के दौरान मंदिर का मुख्य द्वार चार दिनों के लिए बंद कर दिया जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस स्थान पर देवी सती की योनि गिरी थी जिससे शक्तिपीठ बना। अंबुबाची मेले के दौरान देवी का मासिक धर्म का समय होता है। इस मौके पर चार दिनों के लिए मंदिर के परिसर में पुरुषों का प्रवेश करना वर्जित होता है। इन दिनों के दौरान महिला पुजारी ही मंदिर के सारे धार्मिक अनुष्ठान करती हैं। 
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3- भगवान ब्रह्रााजी का मंदिर, राजस्थान
राजस्थान में मौजूद ब्रह्रााजी का एक मात्र मंदिर है। इस प्रसिद्ध मंदिर में विवाहित पुरुषों को ब्रह्रााजी की पूजा करने के लिए गर्भगृह में जाने की अनुमति नहीं हैं। इस मंदिर की खास बात यह कि एक पुरुष देवता का मंदिर होने के बावजूद पुरुष यहां नहीं जा सकते हैं। दरअसल इसके पीछे एक पौराणिक कथा है जिसके अनुसार एक बार ब्रह्रााजी ने अपनी पत्नी देवी सरस्वती के साथ यज्ञ करने का संकल्प लिया। लेकिन यज्ञ के शुभ मुहूर्त पर देवी सरस्वती समय पर नहीं पहुंच सकीं जिसके कारण उनकी जगह पर देवी गायत्री को बिठाकर यज्ञ का धार्मिक अनुष्ठान पूरा किया। जब देवी सरस्वती यज्ञ स्थल पर पहुंची तब यह देखकर देवी सरस्वती को भंयकर गुस्सा आ गया है। तब उन्होंने शाप दिया विवाहित व्यक्ति के द्वारा गर्भगृह में प्रवेश करनी की अनुमति नही दी। जो पुरुष इस मंदिर के गर्भगृह में जाकर पूजा करता है उसके वैवाहिक जीवन में परेशानियां आती हैं।  

4-अट्टुकल भगवती मंदिर, केरल
केरल में अट्टुकल भगवती मंदिर में वर्ष के दौरान एक त्योहार का आयोजन किया जाता है जिसमें केवल महिलाएं ही प्रवेश कर सकती हैं। मंदिर की सभी धार्मिक गतिविधियां कुछ दिनों के लिए केवल महिलाओं के हाथों से ही होती है। अट्टुकल पोंगल के दौरान इस मंदिर में हजारों की संख्या में महिलाएं ही महिलाएं होती है। 


5- चक्कूलाथूकावु मंदिर, केरल
केरल में एक माता भगवती का मंदिर है, जहां पर पुरुषों को साल के विशेष समय के दौरान मंदिर परिसर में प्रवेश की अनुमति नहीं है। दरअसर हर वर्ष दिसंबर के महीने पहले शुक्रवार के दिन धार्मिक कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है। जहां पर पुरुष पुजारी उन महिला भक्तों के पैर को धोते हैं जो 10 दिनों से उपवास पर रहती हैं। इस खास दिन को धनु के नाम से जाना जाता है। इस दिन केवल महिलाएं ही मंदिर में प्रवेश कर सकती हैं।
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