हिंदू धर्म शास्त्रों में अनेक देवी-देवताओं के स्वरुप और चरित्र का वर्णन किया गया है। प्रत्येक देवी-देवता का उनके स्वरुप, आचरण और व्यवहार के अनुरूप ही उनका वाहन होता है। हर देवता अपने वाहन के माध्यम से प्रकृति के एक विशिष्ट गुण का प्रतिनिधित्व करता है। आध्यात्मिक दृष्टिकोण से इन वाहनों के रूप में बहुत ही अद्भुत रहस्य और सूक्ष्म प्रेरणाएं छिपी हुई हैं, जिनको जानकार व्यक्ति प्रकृति द्वारा दिए गए मूक संदेशों को भली-भांति समझकर अपने जीवन में उतार सकता है।
जानें किस देवता की कौन सी है सवारी और उसके पीछे क्या छुपा है संदेश
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मूषक है गणपति की सवारी
गणपति का वाहन मूषक अर्थात चूहा है। चूहे का स्वभाव है कि वह प्रत्येक वस्तु, चाहे वह काम की हो या बेकार सबको कुतरकर क्षति पहुंचाता है। इसी प्रकार कुतर्की लोग भी हर कार्य में अपने कुतर्कों द्वारा व्यवधान उत्पन्न करते हैं। श्री गणेश ज्ञान एवं बुद्धि के देवता हैं तथा कुतर्क चूहा है, जिसे गणेश जी ने अपनी सवारी बनाकर अपने नीचे दबा रखा है। इस बात से यह सन्देश मिलता है कि हमें बुरे लोगों की अर्थहीन बातों को हटाकर उनका दमन कर अपने विवेक से काम लेना चाहिए।
बैल भगवान शिव का वाहन
शिव पुराण में शिवजी का वाहन वृषराज नंदी को बताया गया है। आम तौर पर खामोश रहने वाले बैल का चरित्र उत्तम और समर्पण भाव वाला होता है।बल और शक्ति के प्रतीक बैल को मोह-माया और भौतिक इच्छाओं से परे रहने वाला प्राणी माना जाता है। यह सीधा-साधा प्राणी जब क्रोधित होता है तो शेर से भी भिड़ जाता है। शिव की सवारी बैल से जन-जन को यही प्रेरणा मिलती है कि शक्तिशाली होने पर भी शांत एवं सहज रहना चाहिए व परिश्रम द्वारा जीवन में सदैव धर्म के मार्ग पर चलते रहना चाहिए।
मां दुर्गा करती हैं शेर की सवारी
देवी भागवत के अनुसार माँ दुर्गा की सवारी सिंह वन में संयुक्त परिवार में रहने वाला प्राणी है। यह वन का सबसे शक्तिशाली प्राणी होता है, किंतु अपनी शक्ति को व्यर्थ में खर्च नहीं करता है। आवश्यकता पड़ने पर ही इसका उपयोग करता है। देवी का वाहन शेर यह संदेश देता है कि घर के मुखिया को अपने परिवार को जोड़कर रखना चाहिए तथा व्यर्थ के कार्यों में अपनी शक्ति को न लगाकर घर को सुखी बनाने के लिए प्रयास करना चाहिए।
उल्लू है श्री लक्ष्मी जी का वाहन
उल्लू क्रियाशील प्रवृत्ति का पक्षी है। वह अपना पेट भरने के लिए भोजन की तलाश में निरंतर कार्य करता रहता है। इस कार्य को वह पूरी लगन के साथ करता है। लक्ष्मी के वाहन उल्लू से यही सीखने को मिलता है कि जो व्यक्ति दिन-रात मेहनत करता है, माँ लक्ष्मी की सदैव उन पर कृपा होती है। मां लक्ष्मी हमेशा स्थायी रूप से मेहनती लोगों के घर में निवास करती हैं।