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Kanwar Yatra 2022 Rules : कांवड़ यात्रा में भाग लेने से पहले जरूर जान लें इससे जुड़े नियम...
Thu, 14 Jul 2022 12:06 PM IST
विनोद शुक्ला
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Thu, 14 Jul 2022 12:06 PM IST
सार
Kanwar Yatra 2022 Rules : सावन के महीने में कांवड़ यात्रा का विशेष महत्व होता है। हिंदू धर्म में सावन के महीने में कांवड़ यात्रा करते हुए भगवान शिव की पूजा-अर्चना करने पर विशेष फल की प्राप्ति होती है।
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kanwar yatra 2022: कांवड़ यात्रा के दौरान शिव मंत्रों का लगातार जाप करते रहना चाहिए।
- फोटो : amar ujala
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विस्तार
Kanwar Yatra 2022 Rules : 14 जुलाई,गुरुवार से सावन का पवित्र महीना प्रारंभ हो चुका है। सावन के महीने में भगवान शिव की विशेष रूप से पूजा-आराधना और साधना की जाती है। इसके अलावा सावन के महीने में कांवड़ यात्रा का विशेष महत्व होता है। हिंदू धर्म में सावन के महीने में कांवड़ यात्रा करते हुए भगवान शिव की पूजा-अर्चना करने पर विशेष फल की प्राप्ति होती है। शिव भक्त सावन के महीने में संतान प्राप्ति, सुख-सुविधा में बढ़ोतरी, विवाह और खास तरह की मनोकामना की पूर्ति के लिए कांवड़ यात्रा का संकल्प लेते हैं। कांवड़ यात्रा के दौरान अलग-अलग शिव धामों के लिए कांवड़िए कांवड़ में जल भरकर भगवान शिव का जलाभिषेक के लिए पैदल ही यात्रा पर निकल पड़ते हैं। आइए जानते हैं कांवड़ यात्रा से जुड़े प्रमुख नियमों के बारे में जिसे जानना और इसका पालन करना हर कांवड़िए के लिए जरूरी होता है।
कांवड़ यात्रा के दौरान इन बातों का रखें खास ध्यान
- जय-जय शंकर हर-हर शंकर
- हरी ॐ निरंजन राम हरी ॐ भोले
- जय शिव जय शिव ओंकारा
- जय महाकाल जय शिव शंकर
कांवड़ यात्रा के दौरान न करें ऐसे काम
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कांवड़ यात्रा के दौरान इन बातों का रखें खास ध्यान
- सावन के महीने में कांवड़ यात्रा निकालना बहुत ही शुभ होता है। कांवड़ यात्रा के दौरान सबसे पहले सूर्योदय से पहले उठकर दैनिक क्रियाओं को संपन्न करते हुए स्नान करें। फिर इसके बाद पवित्र गंगाजल को पात्र में भर लें।
- कांवड़ यात्रा के दौरान जलाभिषेक के लिए गंगाजल को तांबे, चांदी या पीतल के पात्र में भरें लेकिन इस बात का विशेष ध्यान रखें कि गंगाजल को प्लास्टिक, एल्युमीनियम और स्टील के बर्तनों में न भरें।
- कांवड़ यात्रा के दौरान पात्र में भरे हुए गंगाजल को शिवजी को अर्पित करने से पहले बीच में कहीं पर इसे जमीन पर नहीं रखना चाहिए।
- कांवड़ यात्रा की शुरुआत हमेशा सूर्योदय के साथ करनी चाहिए और सूर्यास्त के बाद इसे बंद कर देना चाहिए।
- कांवड़ यात्रा के दौरान शिव मंत्रों का लगातार जाप करते रहना चाहिए। आप इन मंत्रों का जाप कर सकते हैं।
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- जय-जय शंकर हर-हर शंकर
- हरी ॐ निरंजन राम हरी ॐ भोले
- जय शिव जय शिव ओंकारा
- जय महाकाल जय शिव शंकर
कांवड़ यात्रा के दौरान न करें ऐसे काम
- कांवड़ यात्रा के दौरान मन को शांत रहते हुए पूरी यात्रा करनी चाहिए। यात्रा के दौरान किसी से वाद-विवाद करने से बचना चाहिए।
- मन में बुरी भावना से आने से रोकना चाहिए।
- यात्रा के दौरान भोजन और जल को कम से कम ग्रहण करना चाहिए।
- यात्रा के दौरान बेकार की बातों को करने से बचना चाहिए और शिव कथा, शिव मंत्रों का ज्यादा से ज्यादा उच्चारण करना चाहिए।
- कांवड़ यात्रा के दौरान नाखूनऔर बाल काटना वर्जित माना गया है।
- कांवड़ यात्रा निकलते हुए नशीली चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए।