Kansa Vadh 2019: कंस से जुड़ी इन 5 बातों को नहीं जानते होंगे आप
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भगवान श्रीकृष्ण की लीलाएं अमर हैं। उन लीलाओं में से एक कंस वध प्रमुख है। भगवान श्रीकृष्ण ने एक ओर जहां राधा रानी के साथ रासलीला कर दुनिया को प्रेम का मार्ग दिखाया, तो दूसरी ओर उन्होंने अपने कंस मामा का वध कर मथुरा के लोगों को उसके पापों से मुक्ति दिलाई और ये संदेश दिया कि पापी या अधर्मी चाहें कोई भी हो उसका अंत किया जाना चाहिए।
पौराणिक कथा के अनुसार, कार्तिक शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को श्रीकृष्ण ने कंस का वध किया था। इसलिए हिन्दू धर्म में इस तिथि को कंस वध के नाम से जाना जाता है। साल 2019 में यह तिथि 7 नवंबर को पड़ रही है। इस अवसर पर हम आपको कंस से जुड़ी वो पांच महत्वपूर्ण बातें बताएंगे जिसको जानकर आप दंग रह जाएंगे।
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यदुवंशी राजा उग्रसेन के पुत्र थे कंस
कंस मथुरा के राजा उग्रसेन के पुत्र थे। कंस ने अपने ही पिता को कारागार में बंदी बना लिया था और गद्दी पर बैठ गया था। कंस के नौ भाई जबकि पांच बहनें थी। देवकी उनकी चचेरी बहन थीं।विज्ञापन विज्ञापन -
जरासंध की बेटियों से किया था विवाह
कंस ने मगध के राजा जरासंध की दो पुत्रियों से विवाह किया था। जरासंध से संबंध जोड़कर वह और भी शक्तिशाली हो गया था। -
बहन देवकी से था स्नेह
कंस अपनी बहन देवकी से बेहद स्नेह करता था। परंतु जब यह आकाशवाणी हुई कि इसकी आठवीं संतान से तेरा वध होगा, तो फिर परिस्थितियाँ बदल गईं। -
कृष्ण को मारने के लिए किये खूब जतन
जब कंस को यह मालूम हुआ कि कृष्ण गोगुल धाम में है, तो उन्होंने कृष्ण को मारने के लिए कई प्रयास किए। परंतु उसे एक में भी सफलता न मिल सकी और अंत में वह भगवान कृष्ण के हाथों मृत्यु को प्राप्त हुआ। -
श्रीकृष्ण कंस वध कर दोबारा उग्रसेन को गद्दी पर बिठाया
भगवान श्रीकृष्ण ने कंस का वध करने से बाद मथुरा की सत्ता पुनः उग्रसेन के हाथों सौंप दी और मथुरा के लोगों को कंस के पापों से मुक्ति दिलाई।