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जैन महाकुंभ: कौन थे बाहुबली और क्या था इनका भगवान विष्णु से संबंध
धर्म डेस्क,अमर उजाला
Updated Sun, 18 Feb 2018 09:39 AM IST
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17 जनवरी 2018, शनिवार से जैन धर्म के पवित्र तीर्थस्थल त्रवणबेलगोला में महाकुंभ की शुरुआत हो चुकी है। बाहुबली के महामस्तकाभिषेक का कार्यक्रम 12 साल में एक बार होता है। हर 12 वें साल में होने वाले महामस्तकाभिषेक में भगवान बाहुबली का अभिषेक किया जाता है। इस महामस्तकाभिषेक में 35 से 40 लाख लोगों के आने की संभावना है। इस बार महामस्तकाभिषेक की थीम है 'आपका सौभाग्य बुला रहा है' रखा गया है। इस आयोजन में जैन ही नहीं बल्कि दूसरे धर्म, संप्रदाय के लोग भी हिस्सा लेते हैं।
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महामस्तकाभिषेक के दौरान यहां जैन साधु, मुनि, त्यागी, संत, माताएं सभी होती हैं। भगवान बाहुबली के सत्य, अहिंसा और शांति के रास्ते पर चलने का संदेश देती हैं, ताकि विश्व के मानव समाज में शांति की स्थापना की जा सके।
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स्वामी भट्टारक का कहना है कि गोम्मटेश्वर भगवान बाहुबली तीर्थंकर श्री ऋषभदेव के पुत्र थे। वह विष्णु के अवतार माने गए और अयोध्या के राजा थे। उनकी दो रानियां थीं। एक रानी से 99 पुत्र और एक पुत्री तथा दूसरी से गोम्मटेश्वर भगवान बाहुबली तथा एक पुत्री सुंदरी थी। बाहुबली का अपने ही भाई भरत से उनके शासन, सत्ता के लोभ तथा चक्रवर्ती बनने की इच्छा के कारण दृष्टि युद्ध, जल युद्ध और मल्ल युद्ध हुआ था।
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इसमें बाहुबली विजयी रहे, लेकिन उनका मन ग्लानि से भर गया और उन्होंने सब कुछ त्यागकर तप करने का निर्णय लिया। मानव जाति को अहिंसा और शांति के संदेश दिए, इसलिए उनके महामस्तकाभिषेक का जैन धर्मावलंबियों में बड़ा महत्व है।