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Dussehra 2021:दशहरा पर माना जाता है इस पक्षी के दर्शन को शुभ

Fri, 15 Oct 2021 10:47 AM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमरउजाला
धर्म डेस्क, अमरउजाला Published by: श्वेता सिंह Updated Fri, 15 Oct 2021 10:47 AM IST
सार

दशहरा के पावन पर्व पर ऐसी कई मान्यताएं है जो काफी लाभकारी और शुभ मानी जाती हैं। ऐसा ही एक मान्यता है कि दशहरा  के दिन यदि आपको नीलकंठ पक्षी के दर्शन हो जायें तो वह अत्यंत ही शुभ है।  

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In Dussehra 2021 to see this bird on Dussehra is considered auspicious
happy dussehra

विस्तार

आज 15 अक्टूबर को पूरे देश में दशहरा मनाया जा रहा है। दशहरा यानि विजयादशमी का त्यौहार पर रावण दहन करते हैं और खुशियां मनाते हैं। दशहरा के पावन पर्व पर ऐसी कई मान्यताएं है जो काफी लाभकारी और शुभ मानी जाती हैं। ऐसा ही एक मान्यता है कि दशहरा  के दिन यदि आपको नीलकंठ पक्षी के दर्शन हो जायें तो वह अत्यंत ही शुभ है। कहते हैं नीलकंठ पक्षी के दर्शन से आपके सभी बिगड़े काम सही हो जाते हैं और आपके जीवन में सुख समृद्धि भी आती है।  चलिए जानते हैं कैसे नीलकंठ पक्षी के  दर्शन करने से बन जाते हैं सभी बिगड़े काम।

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In Dussehra 2021 to see this bird on Dussehra is considered auspicious
Neelkanth bird - फोटो : सोशल मीडिया

नीलकंठ पक्षी के दर्शन का महत्व
नीलकंठ पक्षी को भगवान का प्रतिनिधि माना गया है। दशहरा पर इसके दर्शन होने से धन और संपत्ति में बढ़ोतरी होती है। मान्यता है कि दशहरा के दिन किसी भी समय नीलकंठ पक्षी दिख जाए तो इससे घर में खुशहाली आती है और वहीं जो काम करने जा रहे हैं उसमें सफलता मिलती है।

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राम रावण अंतिम युद्ध

नीलकंठ के दर्शन क्यों शुभ
पुराणों के अनुसार जब भगवान श्री राम रावण का वध करने जा रहे थे। उसी समय पर उन्हें नीलकंठ पक्षी के दर्शन हुए थे। इसके बाद भगवान श्री राम को रावण पर विजय प्राप्त हुई थी।यही कारण है कि इस पक्षी का दिखना शुभ माना जाता है। कहते हैं कि भगवान श्री राम ने इस पक्षी के दिखने के बाद ही रावण पर विजय प्राप्त की थी। विजयदशमी का पर्व जीत का पर्व है। विजयदशमी पर नीलकंठ पक्षी के दर्शनों की परंपरा वर्षों से जुड़ी हुई है। लंका पर विजय प्राप्त करने के बाद जब भगवान राम को ब्राह्मण हत्या का पाप लगा था। उस समय भगवान राम ने अपने भाई लक्ष्मण को साथ मिलकर भगवान शिव की पूजा अर्चना की थी और ब्राह्मण हत्या के पाप से खुद को मुक्त कराया। उस समय भगवान शिव नीलकंठ पक्षी के रूप में धरती पर पधारे थे।

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shiva - फोटो : Google

क्या है नीलकंठ का अर्थ
नीलकंठ अर्थात् जिसका गला नीला हो। जनश्रुति और धर्म शास्त्रों के अनुसार भगवान शिव ही नीलकंठ हैं। इसी कारण से इस पक्षी को भगवान शिव का प्रतिनिधि और स्वरूप दोनों माना जाता है। यह पक्षी भगवान शिव का ही रूप है। दशहरे पर भगवान शिव नीलकंठ पक्षी का रूप धारण कर विचरण करते हैं। इस दिन सभी लोग अपने शस्त्रों का पूजन भी करते हैं। सबसे पहले शस्त्रों पर जल छिड़ककर इन्हें पवित्र किया जाता है। इसके बाद महाकाली स्तोत्र का पाठ कर शास्त्रों पर कुमकुम और हल्दी का तिलक कर हार पुष्पों से श्रृंगार कर मीठे का भोग लगाकर पूजन किया जाता और शाम के समय रावण दहन कर विजयदशमी का त्योहार मनाया जाता है।

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