भगवान हरि का महीना है कार्तिक, जानें इसमें क्या करें और क्या नहीं
कार्तिक मास में शिव जी के पुत्र कार्तिकेय ने तारकासुर नाम के राक्षस का वध किया था, इसलिए इसका नाम कार्तिक पड़ा ।
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हिंदू पंचांग के अनुसार कार्तिक महीना भगवान विष्णु का माह माना जाता है है। कार्तिक माह यश, लाभ और उत्तम स्वास्थ्य की दृष्टि से अति आवश्यक है। शास्त्रों में भी प्रचलित है कि कार्तिक माह में मनुष्य की सभी आवश्यकताओं का बड़ी आसानी से समाधान हो जाया करता है। कहा जाता है कि इस दिन शिव जी के पुत्र कार्तिकेय ने तारकासुर नाम के राक्षस का वध किया था, इसलिए इसका नाम कार्तिक पड़ा । कार्तिक महीने में भगवान लक्ष्मीनारायण की पूजा का विशेष महत्व होता है।
कार्तिक महीने में ही हिन्दूओं के मुख्य तीज-त्यौहार मनाए जाते हैं। कार्तिक महीने की शुरुआत शरद पूर्णिमा से हो जाती है तत्पश्चात करवा चौथ, धनतेरस, दीपावली, गोवर्धन पूजा, भैया दूज, एकादशी आदि पर्व मनाए जाते है। विवाह, शादी, गृह प्रवेश आदि का सिलसिला भी कार्तिक माह में शुरू हो जाता है और कार्तिक महीने का समापन गुरू नानक पूर्णिमा पर होता है। आइए जानते है कि इस दिन क्या करने से पुण्य की प्राप्ति होती है और क्या करने से पाप लगता है ।
कार्तिक मास में पुण्य की प्राप्ति के लिए नदी, तालाब आदि में दीपदान किया जाता है। कार्तिक माह में तुलसी पूजन का विशेष महत्त्व होता है । इसके अलावा व्रत और उपवास नियम और संयम के साथ करना चाहिए। इस माह जमीन पर सोने से मन में सात्विकता का भाव आता है । साथ ही कार्तिक मास में ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए । सूर्योदय से पहले शीतल जल से स्नान कार्तिक मास में सबसे उत्तम माना गया है।
शास्त्रों के अनुसार इस महीने में मांस-मछली व मट्ठा को ग्रहण नहीं करना चाहिए। कार्तिक महीने में उड़द, मूंग, मसूर, चना, मटर, राई इत्यादि का सेवन नहीं करना चाहिए। कार्तिक महीने में नरक चतुर्दशी को छोड़कर अन्य दिन शरीर पर तेल लगाना वर्जित है। इस माह कम बोले और किसी की निंदा या विवाद करने से अशुभ फल की प्राप्ति होगी ।