फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Spirituality ›   Religion ›   history of kumbh mela and importance

क्या आपको पता है देवताओं के 12 दिन और मनुष्यों के 12 वर्षों से जुड़ा कुंभ का यह राज

Fri, 26 Oct 2018 10:45 AM IST
राज किशोर सहाय
राज किशोर सहाय Updated Fri, 26 Oct 2018 10:45 AM IST
विज्ञापन
history of kumbh mela and importance
कुंभ मेला

वृश्चिक राशि में सूर्य, चंद्रमा और बृहस्पति एक साथ होंगे, तब 5 दिसंबर, रात 10 बजकर 23 मनट पर यह दुर्लभ योग शुरू हो जाएगा, जो ढाई दिन तक चलेगा। द्वादश महाकुंभ के इस योग में कुरुक्षेत्र स्थित ब्रह्मसरोवर में स्नान करने से चारों धामों की तीर्थ यात्रा करने का फल मिलेगा और सांसारिक, मानसिक सभी पाप-ताप से मुक्ति मिलेगी। सभी मोक्षदायिनी नदियों की क्षमता रखने वाला ब्रह्म सरोवर कुंभ स्नान के लिए बहुत ही पुण्यदाई है।

विज्ञापन


कुंभ भारतीय संस्कृति का ऐसा प्रारूप है, जिसने हजारों वर्षों से भारत को एक रखा है। कुंभ का आध्यात्मिक के साथ ही सामाजिक-सांस्कृतिक, राजनीतिक और आर्थिक रूप से बहुत महत्व था। वैदिक काल में जिन बारह तीर्थों पर कुंभ का वर्णन मिलता है, उनमें एक कुरुक्षेत्र भी है। धर्म सम्राट स्वामी करपात्री ने  ‘कुंभ पर्व निर्णय’ पुस्तक में यहां कुंभ का उल्लेख किया है। उन्होंने देवताओं के 12 दिनों में और मनुष्यों के 12 वर्षों में 12 कुंभपर्वों का वर्णन किया है। प्रयागराज, हरिद्वार, उज्जैन और नासिक को छोड़कर कालांतर में आठ जगहों पर कुंभ परंपरा का लोप हो गया है। परंतु आगम-निगम, पुराणादि, धर्मशास्त्र और महाकाव्य आदि में संकलित इतिहास क्षतिग्रस्त होकर भी किसी न किसी रूप में वर्तमान में है।
विज्ञापन


कुंभकोणम तमिलनाडू में कुंभ महालया के रूप में आज भी कुंभ की परंपरा विद्यमान है। हालांकि वहां एक दिन में ही सारा कार्यक्रम संपन्न हो जाता है। पिछले दिनों सर्वमंगला अध्यात्म योग पीठ, सिमरिया, बेगूसराय, बिहार के स्वामी चिदात्मन समेत साधु-संतों और नागरिकों प्रयासों से आठ सुप्त कुंभस्थलियों को जगाने के प्रयास हुए। बद्रीनाथ, पुरी (उड़ीसा), गंगासागर (बंगाल), द्वारका (गुजरात), रामेश्वरम और कुंभकोनम (तमिलनाडु) में सुप्त कुंभ जगाए जा चुके हैं। 2017 में  सिमरिया धाम, बेगूसराय, बिहार में महाकुंभ का शंखनाद हुआ। करीब डेढ़ करोड़ लोगों ने गंगापुण्य कमाया। वहां का आरंभ मत्स्यावतार की तरह बढ़ता ही जा रहा है।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें आस्था समाचार से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। आस्था जगत की अन्य खबरें जैसे पॉज़िटिव लाइफ़ फैक्ट्स,स्वास्थ्य संबंधी सभी धर्म और त्योहार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed