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Guruwar Upay: गुरुवार का दिन भगवान विष्णु को समर्पित, जानिए इस दिन केले के पेड़ का पूजन करने के लाभ और महत्व
Thu, 10 Apr 2025 11:27 AM IST
विनोद शुक्ला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Thu, 10 Apr 2025 11:27 AM IST
सार
सनातन धर्म में केले का वृक्ष अत्यंत पावन और शुभ माना गया है। पुराणों में उल्लेख मिलता है कि इस वृक्ष में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का वास होता है।
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केले का संबंध देवगुरु बृहस्पति और भगवान विष्णु से बताया गया है।
- फोटो : adobe stock
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विस्तार
भारतीय संस्कृति में वृक्षों और वनस्पतियों को विशेष महत्व दिया गया है। इनमें से कुछ वृक्षों को पवित्र मानकर उनकी पूजा की जाती है। ऐसा ही एक वृक्ष है केला, जिसकी पूजा विशेष रूप से गुरुवार के दिन की जाती है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, केले का संबंध देवगुरु बृहस्पति और भगवान विष्णु से बताया गया है। इस दिन केले के वृक्ष की पूजा करने से जीवन में सुख, समृद्धि, वैवाहिक सुख और संतान प्राप्ति का आशीर्वाद मिलता है।
1. केले के वृक्ष का धार्मिक महत्व
सनातन धर्म में केले का वृक्ष अत्यंत पावन और शुभ माना गया है। पुराणों में उल्लेख मिलता है कि इस वृक्ष में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का वास होता है। इसलिए इसे सौभाग्य और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। कई स्थानों पर मंदिरों में केले के पत्तों से ही मंडप और तोरण बनाए जाते हैं, जिससे वातावरण पवित्र बना रहता है।
2. देवगुरु बृहस्पति और केले के वृक्ष का संबंध
गुरुवार का दिन देवगुरु बृहस्पति को समर्पित है, जो ज्ञान, धर्म, संतान सुख और वैवाहिक जीवन के कारक माने जाते हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जिनकी कुंडली में बृहस्पति ग्रह कमजोर होता है, उन्हें केले के वृक्ष की पूजा करने और गुरुवार का व्रत रखने की सलाह दी जाती है। ऐसा करने से शिक्षा, धन, और परिवारिक जीवन में शुभ फल प्राप्त होते हैं।
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3. गुरुवार को केले के वृक्ष की पूजा विधि
गुरुवार के दिन केले के वृक्ष की पूजा करने के लिए प्रातः स्नान करके पीले वस्त्र धारण करें और केले के वृक्ष के पास जाकर जल अर्पित करें। जल में हल्दी मिलाना शुभ माना जाता है। इसके बाद चंदन, अक्षत और पीले फूल अर्पित करें तथा घी का दीपक जलाकर बृहस्पति देव का ध्यान करें। "ॐ बृं बृहस्पतये नमः" मंत्र का 108 बार जप करें और गुड़ व चने का भोग लगाकर भगवान विष्णु की प्रार्थना करें। पूजा के दौरान केले के वृक्ष के नीचे बैठकर गुरुवार व्रत कथा का पाठ करना भी शुभ होता है। दिनभर व्रत रखें और संध्या के समय पीले रंग का सात्विक भोजन करें।
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4. गुरुवार को केले का सेवन वर्जित क्यों है?
शास्त्रों में कहा गया है कि जिस वृक्ष की पूजा की जाती है, उसका फल उसी दिन नहीं खाना चाहिए। गुरुवार के दिन केले की पूजा होने के कारण इस दिन इसका सेवन वर्जित माना गया है।
5. केले के वृक्ष की पूजा के लाभ
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1. केले के वृक्ष का धार्मिक महत्व
सनातन धर्म में केले का वृक्ष अत्यंत पावन और शुभ माना गया है। पुराणों में उल्लेख मिलता है कि इस वृक्ष में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का वास होता है। इसलिए इसे सौभाग्य और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। कई स्थानों पर मंदिरों में केले के पत्तों से ही मंडप और तोरण बनाए जाते हैं, जिससे वातावरण पवित्र बना रहता है।
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2. देवगुरु बृहस्पति और केले के वृक्ष का संबंध
गुरुवार का दिन देवगुरु बृहस्पति को समर्पित है, जो ज्ञान, धर्म, संतान सुख और वैवाहिक जीवन के कारक माने जाते हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जिनकी कुंडली में बृहस्पति ग्रह कमजोर होता है, उन्हें केले के वृक्ष की पूजा करने और गुरुवार का व्रत रखने की सलाह दी जाती है। ऐसा करने से शिक्षा, धन, और परिवारिक जीवन में शुभ फल प्राप्त होते हैं।
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3. गुरुवार को केले के वृक्ष की पूजा विधि
गुरुवार के दिन केले के वृक्ष की पूजा करने के लिए प्रातः स्नान करके पीले वस्त्र धारण करें और केले के वृक्ष के पास जाकर जल अर्पित करें। जल में हल्दी मिलाना शुभ माना जाता है। इसके बाद चंदन, अक्षत और पीले फूल अर्पित करें तथा घी का दीपक जलाकर बृहस्पति देव का ध्यान करें। "ॐ बृं बृहस्पतये नमः" मंत्र का 108 बार जप करें और गुड़ व चने का भोग लगाकर भगवान विष्णु की प्रार्थना करें। पूजा के दौरान केले के वृक्ष के नीचे बैठकर गुरुवार व्रत कथा का पाठ करना भी शुभ होता है। दिनभर व्रत रखें और संध्या के समय पीले रंग का सात्विक भोजन करें।
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4. गुरुवार को केले का सेवन वर्जित क्यों है?
शास्त्रों में कहा गया है कि जिस वृक्ष की पूजा की जाती है, उसका फल उसी दिन नहीं खाना चाहिए। गुरुवार के दिन केले की पूजा होने के कारण इस दिन इसका सेवन वर्जित माना गया है।
5. केले के वृक्ष की पूजा के लाभ
- आर्थिक स्थिति मजबूत होती है और धन प्राप्ति के मार्ग खुलते हैं।
- वैवाहिक जीवन सुखमय बनता है और विवाह में आ रही रुकावटें दूर होती हैं।
- संतान सुख प्राप्त होता है और परिवार में खुशहाली आती है।
- विद्या और बुद्धि में वृद्धि होती है, विशेषकर छात्रों के लिए यह पूजा लाभकारी होती है।
- शारीरिक और मानसिक शांति मिलती है, जिससे जीवन में सकारात्मकता बनी रहती है।
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