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गोवर्धन पूजा में भगवान को क्यों लगाते हैं 56 तरह के भोग, क्या है परंपरा ?

Thu, 08 Nov 2018 12:10 PM IST
धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Updated Thu, 08 Nov 2018 12:10 PM IST
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govardhan annakoot puja 2018 importance of 56 bhog and story
govardhan puja 2018

दिवाली से ठीक एक दिन बाद गोवर्धन पूजा जिसे अन्नकूट पर्व भी कहा जाता है मनाया जाता है। कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा के दिन गोवर्धन और गाय की पूजा का विशेष महत्व होता है। ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। वृंदावन और मथुरा में इस दिन गोवर्धन पूजा और अन्नकूट उत्सव मनाया जाता है।

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गोवर्धन पूजा का महत्व
कहा जाता है कि भगवान श्रीकृष्ण ने इंद्र का अभिमान चूर करने के लिए गोवर्धन पर्वत को अपनी छोटी उंगली पर उठाकर संपूर्ण गोकुल वासियों की इंद्र के कोप से रक्षा की थी। इन्द्र के अभिमान को चूर करने के बाद भगवान श्रीकृष्ण ने कहा था कि कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा के दिन 56 भोग बनाकर गोवर्धन पर्वत की पूजा करें। गोवर्धन पर्वत से गोकुल वासियों को पशुओं के लिए चारा मिलता है। गोवर्धन पर्वत बादलों को रोककर वर्षा करवाता है जिससे कृषि  उन्नत होती है। इसलिए गोवर्धन की पूजा की जानी चाहिए।
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पूजा-विधि और सामग्री
गोवर्धन पूजा के दिन अन्नकूट बनाकर गोवर्धन पर्वत और भगवान श्रीकृष्ण की पूजा की जाती है। इसके पीछे एक मान्यता यह भी है कि इन्द्र के कोप से बचने के लिए गोकुल वासियों ने जब गोवर्धन पर्वत के नीचे शरण ली तब गोकुल वासियों ने 56 भोग बनाकर श्रीकृष्ण को भोग लगाया था। इससे प्रसन्न होकर श्री कृष्ण ने गोकुल वासियों को आशीर्वाद दिया कि वह गोकुल वासियों की रक्षा करेंगे। इन्द्र से भयभीत होने की कोई जरूरत नहीं है।
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अन्नकूट बनाने के लिए कई तरह की सब्जियां, दूध और मावे से बने मिष्ठान और चावल का प्रयोग किया जाता है। अन्नकूट में ऋतु संबंधी अन्न, फल, सब्जियां का प्रसाद बनाया जाता है। गोवर्धन पूजा में भगवान कृष्ण के साथ धरती पर अन्न उपजाने में मदद करने वाले सभी देवों जैसे, इन्द्र, अग्नि, वृक्ष और जल देवता की भी आराधना की जाती है। गोवर्धन पूजा में इन्द्र की पूजा इसलिए होती है क्योंकि अभिमान चूर होने के बाद इन्द्र ने श्रीकृष्ण से क्षमा मांगी और आशीर्वाद स्वरूप गोवर्धन पूजा में इन्द्र की पूजा को भी मान्यता दे दी।


 56 भोग की परंपरा
 ऐसी मान्यता है इंद्र के प्रकोप से ब्रजवासियों को बचाने के लिए और उनका घमंड तोड़ने के लिए भगवान श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत उठाया था। इंद्र ने अपनी ताकत का इस्तेमाल करते हुए लगातार 7 दिनों तक ब्रज में मूसलाधार बारिश कराते रहे। तब भगवान कृष्ण ने लगातार सात दिनों तक भूखे-प्यासे अपनी उंगली पर गोर्वधन पर्वत को उठाएं रखना पड़ा था। इसके बाद उन्हें सात दिनों और आठ पहर के हिसाब से 56 व्यंजन खिलाए गए थे। माना जाता है तभी से ये 56 भोग की परम्परा की  शुरूआत हुई।

शुभ मुहूर्त का समय

पहला मुहूर्त- प्रातः 06 : 41 मिनट से 08 : 50 मिनट तक
दूसरा मुहूर्त- सायंकाल 03 : 15 मिनट से 05 : 25 मिनट तक
 
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