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यूं ही पृथ्वी पर हाहाकर मचाती स्वर्ग से उतरी थी गंगा मैया

Wed, 19 Jun 2013 09:26 AM IST
राकेश/इंटरनेट डेस्क
राकेश/इंटरनेट डेस्क Updated Wed, 19 Jun 2013 09:26 AM IST
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ganga dussehra 2013

यूं तो पृथ्वी पर अनेकों नदियां बहती हैं लेकिन केवल एक ही ऐसी नदी है जिसे हम माता कहकर पुकारते हैं। इस नदी का नाम है गंगा। पृथ्वी पर आने से पहले गंगा स्वर्ग में रहती थी और देवी-देवता इसके निर्मल और पवित्र जल में स्नान किया करते थे। इसी नदी के जल में स्नान करके देवी पार्वती गोरी हुई और गौरी कहलायी। भगवान श्री कृष्ण ने गीता में कहा है कि, नदियों में मैं गंगा हूं।

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इस देव नदी को पृथ्वी पर लाने का श्रेय महाराज भागीरथ को जाता है। इनकी घोर तपस्या से प्रसन्न होकर ही महादेव ने गंगा को पृथ्वी पर भेजने का आश्वासन दिया। लेकिन तेज धार वाली गंगा माता पृथ्वी पर उतरती तो हाहाकार मच जाता। ऐसे में महादेव ने अपनी जटाओं में गंगा को स्थान दिया शिव की जटाओं से होती हुई गंगा की निर्मल धार पृथ्वी पर उतर आई। जिस दिन गंगा पृथ्वी पर आयी थी उस दिन ज्येष्ठ मास की शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि थी।
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आज वही पावन दिन है जब गंगा पृथ्वी पर आयी थी। इसलिए प्रतिवर्ष गंगा अवतरण दिवस को गंगा दशहरा के नाम से मनाया जाता है। इस दिन गंगा नदी में स्नान करके गंगा मैया की पूजा अर्चना एवं दान करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है।
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गंगा दशहरा पर लाखों की संख्या में भक्त गंगा किनारों पर पहुंचते हैं और गंगा स्नान का पुण्य लाभ प्राप्त करते हैं। इस वर्ष गंगा में आई बाढ़ की वजह से दिल्ली हरिद्वार मुख्य मार्ग पर यातायात बंद हो गया है। इसलिए गंगा दशहरा पर हरिद्वार में गंगा स्नान करने की चाहत रखने वाले बहुत से भक्तों को निराशा हो सकती है।


इस वर्ष गंगा दशहरा के मौके पर भी गंगा अपने उसी चिरंतन और प्रलंयकारी रूप में बह रही है। जो लोग गंगा स्नान को नहीं जा पा रहे उन्हें घर पर ही स्नान करने के जल में गंगा जल मिलाकर मां गंगा का ध्यान करते हुए स्नान करना चाहिए। इससे भी गंगा स्नान का पुण्य प्राप्त होता है।

रोचकः गंगा दशहरा के विषय में मान्यता है कि इस दिन बालों की एक लट काटकर गंगा में प्रवाहित करने से बाल स्वस्थ रहते हैं और लंबे होते हैं।

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