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दुनिया का सबसे अमीर मंदिर लेकिन भगवान सबसे गरीब, आज तक नहीं चुका पाए कर्ज
Tue, 18 Jun 2019 03:37 PM IST
विनोद शुक्ला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Tue, 18 Jun 2019 03:37 PM IST
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tirupati balaji temple
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भारत मंदिरों का देश है। यहां पर जितने मंदिर उतने ही उनमें रहस्य और अलग-अलग मान्यताएं छिपी हुई हैं। मंदिरों में आस्था रखने वालों की कोई कमी नहीं है। इन्हीं मंदिरों में सबसे प्रसिद्ध मंदिर है तिरुपति बालाजी मंदिर। यह मंदिर दुनिया का सबसे अमीर मंदिर है। अनुमान के मुताबिक मंदिर ट्रस्ट के खजाने में 50 हजार करोड़ से अधिक की संपत्ति है। देश का सबसे अमीर मंदिर होने के बाद भी इस मंदिर के भगवान आज भी कर्ज के बोझ के तले दबे हुए हैं।
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आप सोच रहे होंगे जिस मंदिर में इतना धन-दौलत होने के बावजूद इस मंदिर के भगवान इतने गरीब कैसे हैं जो आज भी कर्ज उतार रहे हैं। भक्तों की हर मनोकामना पूरी करने वाले भगवान वेंकटेश्वर आखिरकार अपना ही कर्ज क्यों नही भर पा पाएं हैं। इसके पीछे एक धार्मिक मान्यता है। जिसके अनुसार बालाजी धन के देवता कुबेर के कर्जदार हैं और कलियुग के अंत तक में वह कुबेर का कर्ज उतार पाएंगे।
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कर्ज के चलते माने जाते हैं सबसे गरीब देवता बालाजी
हिंदू शास्त्रों में कहा जाता है अगर आप बेशुमार धन दौलत और संपदा के मालिक है लेकिन आपके ऊपर किसी का दिया हुआ कर्ज है तो उसे गरीब ही माना जाता है। इसलिए तिरुपति बालाजी मंदिर में जमा अकूत धन के बावजूद बालाजी गरीब हैं। अपने भगवान बालाजी के ऊपर से कर्ज उतारने के लिए बड़ी संख्या में भक्त उन्हें आज भी सोना-चांदी, पैसा और बहुमूल्य चीजों का दान करते आ रहे हैं।
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क्यों हुए बालाजी कुबेर के कर्जदार
कथा के अनुसार एक बार भृग ऋषि बैकुंठ में पधारे। जहां पर भगवान विष्णु निद्रा की मुद्रा में शेषशैय्या पर लेटे हुए थे। तभी भृग ऋषि ने भगवान विष्णु की छाती पर लात से जोर से प्रहार किया। ऋषि के लात मारते ही विष्णुजी ने तुरंत भृगु ऋषि के चरण पकड़ लिया और पूछा कि ऋषिवर पैर में चोट तो नहीं लगी।
भगवान विष्णु की इस सहनशीलता से भृगु ऋषि को लज्जा आ गई और कहा कि समस्त यज्ञ के प्रमुख और वास्तविक अधिकारी आप ही हैं। लेकिन यह सब प्रकरण देवी लक्ष्मी के सामने हो रहा था जिसे देखकर वह, भृगु ऋषि और विष्णुजी से रुष्ट हो गईं कि भगवान विष्णु ने भृगु ऋषि को दंड क्यों नहीं दिया।
देवी लक्ष्मी ने छोड़ दिया था वैकुंठ
इस बात को लेकर देवी लक्ष्मी नाराज होकर वैकुंठ का त्याग कर धरती पर चली आईं। कन्या के रुप में एक राजा के घर जन्म लिया। उन्हें ढूंढते-ढूंढते भगवान विष्णुजी भी धरती पर आ गए और व्यंकटेश के रुप में कन्या पद्मावती के पास पहुंचे।
भगवान विष्णु ने पद्मावती और उनके पिता के सामने विवाह का प्रस्ताव रखा, जिसे देवी ने स्वीकार कर लिया। लेकिन धरती की मान्यताओं के अनुसार एक राजकुमारी से विवाह के लिए विष्णुजी को धन की जरूरत पड़ी। जोकि उनके पास नहीं था।
तब उन्होंने भगवान शंकर और ब्रह्राजी को साक्षी मानकर कुबेर से काफी मात्रा में धन कर्ज लिया और रानी पद्मावती संग परिणय सूत्र में बंधे।
बालाजी भगवान आज तक नहीं चुका पाए हैं कर्ज
कुबेर से कर्ज लेते समय विष्णुजी ने उन्हें वचन दिया था कि कलियुग के अंत तक वह अपना सारा कर्ज चुका देंगे और कर्ज की समाप्ति होने तक वे इस रकम का ब्याज यानी सूद चुकाते रहेंगे।
इसी मान्यता के अनुसार बड़ी मात्रा में भक्त बालाजी को धन-दौलत भेंट करते हैं ताकि वे कर्ज मुक्त हो जाएं। लेकिन कुबेर का कर्ज इतना बड़ा था जिसकी भरपाई आज तक पूरी नहीं हो सकी। इसी कथा के अनुसार भगवान बालाजी के पास इतना धन दौलत होने के बाद सभी देवताओं में सबसे गरीब हैं।