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भगवान विष्णु के चार महीने तक सोने जगने का रहस्य
रुचि शुक्ला
Updated Tue, 11 Nov 2014 01:09 PM IST
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कहा जाता है कि चातुर्मास के दिनों में एक ही जगह रुकना जरुरी है, जैसा कि साधु संन्यासी इन दिनों किसी एक नगर या बस्ती में ठहरकर धर्म प्रचार का काम करते हैं। माना जाता है कि देवशयनी एकादशी के दिन सभी देवता, उनके अधिपति विष्णु सो जाते हैं। फिर चार माह बाद देवोत्थान एकादशी को जागते हैं। इसलिए इस अवधि मे कोई विवाह नया निर्माण या कारोबार, शुभ कार्य आरंभ नहीं होता।
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श्रद्धालु जन सोचते होंगे कि देवता भी क्या सचमुच सोते हैं। पर वे एकादशी के दिन सुबह तड़के ही विष्णु और उनके सहयोगी देवताओं का पूजन करने के बाद शंख- घंटा घड़ियाल बजाने लगते हैं। पारंपरिक आरती कीर्तन के साथ वे गाने लगते हैं- उठो देवा, बैठो देवा, अंगुरिया चटकाओं देवा।‘इस आह्रान में भी संदेश छुपा है।
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स्वामी नित्यानंद सरस्वती के अनुसार वर्षा के दिनों में सूर्य की स्थिति और ऋतु प्रभाव बताने, उस प्रभाव से अपना सामंजस्य बिठाने का संदेश छिपा है। वैदिक वांग्मय के अनुसार सूर्य सबसे बड़े देवता हैं। वर्षा काल में अधिकांश समय सूर्य देवता बादलों में छिपे रहते हैं। इसलिए ऋषियों ने कहा कि इन चार महीनों में विष्णु सो जाते हैं। यह अवधि आहार विहार के मामले में खास सावधानी रखने तक ही सीमित नहीं है।
इसमें खास शासन अनुशासन भी है। इसका उद्देश्य वर्षा के दिनों में होने वाले प्रकृति परिवर्तनों के कारण फैलने वाली मौसमी बीमारियों से सुरक्षा भी है। निजी जीवन में स्वास्थ्य संतुलन का ध्यान रखने के साथ यह चार माह की अवधि साधु संतों के लिए भी विशेष दायित्वों का तकाजा लेकर आती है। घूम-घूम कर धर्म अध्यात्म की शिक्षा देने लोक कल्याण की गतिविधियों को चलाते रहने वाले साधु संत इन दिनों एक ही जगह पर रुक कर साधना शिक्षण करते हैं।