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यूं ही नहीं कहते गाय के गोबर में लक्ष्मी का वास है
राकेश झा/ अमर उजाला, दिल्ली।
Updated Wed, 05 Mar 2014 09:12 AM IST
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को शुद्घ करते हैं। कहते हैं जिस स्थान को नियमित गाय के गोबर से लीपा जाता
है वहां धरती पवित्र रहती है और घर में लक्ष्मी का वास रहता है।
ऐसी मान्यता यूं ही नहीं है। इस संदर्भ में एक कथा है कि सभी देवी देवताओं ने गाय के विभिन्न अंगों में अपना स्थान प्राप्त कर लिया। इसके बाद देवी लक्ष्मी गाय के समक्ष आई। देवी लक्ष्मी ने कहा मैं तुम्हारे शरीर में वास करना चाहती हूं।
गौ माता ने लक्ष्मी से कहा, मेरे शरीर के सभी अंगों पर देवताओं का वास हो चुका है। आप चाहें तो मेरे गोबर में वास कर सकती हैं। देवी लक्ष्मी ने गौ माता की यह बात स्वीकार कर ली और गोबर में वास कर गईं। इसके बाद से ही गाय के गोबर को पवित्र और लक्ष्मी स्वरुप माना जाने लगा।
ऐसी मान्यता यूं ही नहीं है। इस संदर्भ में एक कथा है कि सभी देवी देवताओं ने गाय के विभिन्न अंगों में अपना स्थान प्राप्त कर लिया। इसके बाद देवी लक्ष्मी गाय के समक्ष आई। देवी लक्ष्मी ने कहा मैं तुम्हारे शरीर में वास करना चाहती हूं।
गौ माता ने लक्ष्मी से कहा, मेरे शरीर के सभी अंगों पर देवताओं का वास हो चुका है। आप चाहें तो मेरे गोबर में वास कर सकती हैं। देवी लक्ष्मी ने गौ माता की यह बात स्वीकार कर ली और गोबर में वास कर गईं। इसके बाद से ही गाय के गोबर को पवित्र और लक्ष्मी स्वरुप माना जाने लगा।