{"_id":"5e00c6288ebc3e88217d2c3e","slug":"christmas-celebration-2019-merry-christmas","type":"story","status":"publish","title_hn":"Christmas 2019: संत निकोलस कैसे बने सैंटा क्लॉज","category":{"title":"Religion","title_hn":"धर्म","slug":"religion"}}
Christmas 2019: संत निकोलस कैसे बने सैंटा क्लॉज
Tue, 24 Dec 2019 12:27 AM IST
योगेश जोशी
धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: योगेश जोशी
Updated Tue, 24 Dec 2019 12:27 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
- साल के अंत में सर्द मौसम के साथ ‘जिंगल बेल जिंगल बेल’ की धुन सुनाई देने लगी है। बच्चों को सेंटा का इंतजार है क्योंकि वह उनके लिए खूबसूरत तोहफे लेकर आएगा। 25 दिसंबर को पूरी दुनिया में क्रिसमस का त्योहार मनाया जाता है।
- यह पर्व ईसाई समुदाय जीसस क्राइस्ट के जन्म दिवस के रूप में मनाया जाता है। क्रिसमस के मौके पर सबसे ज्यादा क्रेज सैंटा क्लॉज का होता है, खासतौर पर बच्चे बेसब्री से सैंटा क्लॉज से उपहार पाने के लिए इंतजार करते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं सैंटा क्लॉज क्यों बच्चों को उपहार देते हैं और कब से शुरू हुई परंपरा आइए जानते हैं।
- सैंटा क्लॉज के बारे में ऐसी मान्यता है कि सैंटा का घर उत्तरी ध्रुव पर स्थित है और वे उड़ने वाले रेनडियर की गाड़ी पर चलते हैं। हालांकि सैंटा का यह रूप 19वीं सदी से चलन में आया उसके पहले ऐसा नहीं था।
- संत निकोलस को असली सैंटा माना जाता है। संत निकोलस का जन्म प्रभु इशु की मौत के 280 साल बाद मायरा में हुआ था। संत निकोलस बचपन में ही अनाथ हो गए थे जिसके कारण उनकी प्रभु यीशु में गहरी आस्था थी।
- संत निकोलस बड़े होकर ईसाई धर्म के पादरी फिर बाद में बिशप बनें। उन्हें बच्चों और जरुरतमंद लोगों को उपहार देना बहुत अच्छा लगता था।
- संत निकोलस जब भी किसी को उपहार देते थे तो हमेशा आधी रात को ही देते थे क्योंकि उपहार देते हुए नजर आना पसंद नहीं करते थे और वह अपनी पहचान किसी के सामने जाहिर करना नहीं चाहते थे।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन