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Chaturmas 2025: चातुर्मास में चार महीनों के लिए क्यों वर्जित होते हैं सभी शुभ कार्य, जान लें नियम और महत्व
Mon, 16 Jun 2025 11:06 AM IST
विनोद शुक्ला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Mon, 16 Jun 2025 11:06 AM IST
सार
Chaturmas 2025: चातुर्मास को चौमासा के नाम भी जाना जाता है। चातुर्मास के दौरान किसी भी तरह का शुभ और मांगलिक कार्य करना वर्जित होता है। इस साल चातुर्मास 6 जुलाई से 01 नवंबर तक चलेगा।
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चातुर्मास 6 जुलाई से लेकर 01 नवंबर तक रहेगा।
- फोटो : Adobe Stock
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विस्तार
Chaturmas 2025: हिंदू धर्म में चातुर्मास का विशेष महत्व होता है। चातुर्मास के चार महीने ऐसे होते हैं जिसमें किसी भी तरह का शुभ काम करना अच्छा नहीं माना जाता है। पंचांग के अनुसार देवशयनी एकादशी से लेकर देवउठनी एकादशी तक का समय चातुर्मास का होता है। देवशयनी एकादशी से चातुर्मास की शुरूआत होती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार चातुर्मास के दौरान सृष्टि के संचालन कर्ता भगवान विष्णु चार माह के लिए क्षीर सागर में योग निद्रा में चले जाते हैं। जिसके कारण हिंदू धर्म में इस दौरान कोई भी शुभ और मांगलिक कार्य करना वर्जित हो जाता है। आपको बता दें कि हर साल आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी से चातुर्मास की शुरुआत हो जाती है और कार्तिक माह की एकादशी को यह खत्म हो जाता है। आइए जानते हैं आखिर चातुर्मास में कोई भी शुभ काम क्यों नहीं कर सकते हैं, इसके पीछे क्या कारण हैं।
चातुर्मास 2025 कब से होंगे शुरू
चातुर्मास जैसे कि इसके नाम से ही स्पष्ट होता है कि इसकी चार माह। यानी चार महीने की खंड को चातुर्मास या फिर चौमासा के नाम जाना है। इन चार महीनों में श्रावण, भादों, अश्विन और कार्तिक महीना शामिल होता है। साल 2025 में चातुर्मास 6 जुलाई से लेकर 01 नवंबर तक रहेगा।
चातुर्मास पर शुभ योग
इस बार भी चातुर्मास पर कई तरह के शुभ योगों का निर्माण देखने को मिलेगा। साल 2025 में चातुर्मास के दौरान सर्वार्थसिद्धि योगा और अमृत योग समेत कई दूसरे योग भी बनेंगे। इसके अलावा मिथुन राशि में चतुर्ग्रही योग भी बनेगा। जिसमें सूर्य, बुध, गुरु और चंद्रमा ये चारो ग्रह मिलकर चतुर्ग्रही योग का निर्माण करेंगे। धर्म शास्त्रों के अनुसार इन शुभ योगों में भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी, भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने कई गुने शुभ फलों की प्राप्ति होती है।
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हिंदू धर्म ग्रंथों में भगवान विष्णु को सृष्टि का पालनहार माना जाता है। हिंदू मान्यताओं के अनुसार किसी भी शुभ काम को करने में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा अवश्य ही की जाती है। लेकिन हर वर्ष आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि से लेकर कार्तिक माह की एकादशी तिथि तक भगवान विष्णु माता लक्ष्मी के साथ चार माह तक योग निद्रा में होते हैं जिसके साथ सभी देवी और देवता है भी योगनिद्रा में होते हैं। इस कारण से अगर इस दौरान कोई भी शुभ काम या मांगलिक कार्य किया जाता है तो उसमें भगवान विष्णु समेत अन्य दूसरे देवताओं का आशीर्वाद नहीं मिलता है, जिससे कार्यों में पूर्ण फल की प्राप्ति नहीं होती है। इसी कारण से चातुर्मास के चार महीनों के दौरान हिंदू धर्म में कोई भी शुभ और मांगलिक कार्य नहीं किया जाता है।
सनातन धर्म में चातुर्मास का विशेष महत्व होता है। इस दौरान जब भगवान विष्णु चार माह के लिए योगनिद्रा में होते हैं तो इसमें व्यक्तिक को पूजा-पाठ, मंत्र साधना, आराधना और भजन-कीर्तन करना शुभ होता है। चातुर्मास के दौरान खुद पर संयम, साधना, सेवा और तप करने से जीवन में शुभ परिणामों की प्राप्ति होती है। इसके अलावा चातुर्मास के अवधि के दौरान साधु-संतों का संगत करना और दान-पुण्य का काम करना विशेष फलदायी होता है।
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चातुर्मास 2025 कब से होंगे शुरू
चातुर्मास जैसे कि इसके नाम से ही स्पष्ट होता है कि इसकी चार माह। यानी चार महीने की खंड को चातुर्मास या फिर चौमासा के नाम जाना है। इन चार महीनों में श्रावण, भादों, अश्विन और कार्तिक महीना शामिल होता है। साल 2025 में चातुर्मास 6 जुलाई से लेकर 01 नवंबर तक रहेगा।
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चातुर्मास पर शुभ योग
इस बार भी चातुर्मास पर कई तरह के शुभ योगों का निर्माण देखने को मिलेगा। साल 2025 में चातुर्मास के दौरान सर्वार्थसिद्धि योगा और अमृत योग समेत कई दूसरे योग भी बनेंगे। इसके अलावा मिथुन राशि में चतुर्ग्रही योग भी बनेगा। जिसमें सूर्य, बुध, गुरु और चंद्रमा ये चारो ग्रह मिलकर चतुर्ग्रही योग का निर्माण करेंगे। धर्म शास्त्रों के अनुसार इन शुभ योगों में भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी, भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने कई गुने शुभ फलों की प्राप्ति होती है।
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चातुर्मास में क्यों नहीं किए जाते हैं शुभ कामहिंदू धर्म ग्रंथों में भगवान विष्णु को सृष्टि का पालनहार माना जाता है। हिंदू मान्यताओं के अनुसार किसी भी शुभ काम को करने में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा अवश्य ही की जाती है। लेकिन हर वर्ष आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि से लेकर कार्तिक माह की एकादशी तिथि तक भगवान विष्णु माता लक्ष्मी के साथ चार माह तक योग निद्रा में होते हैं जिसके साथ सभी देवी और देवता है भी योगनिद्रा में होते हैं। इस कारण से अगर इस दौरान कोई भी शुभ काम या मांगलिक कार्य किया जाता है तो उसमें भगवान विष्णु समेत अन्य दूसरे देवताओं का आशीर्वाद नहीं मिलता है, जिससे कार्यों में पूर्ण फल की प्राप्ति नहीं होती है। इसी कारण से चातुर्मास के चार महीनों के दौरान हिंदू धर्म में कोई भी शुभ और मांगलिक कार्य नहीं किया जाता है।
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चातुर्मास में क्या करना शुभसनातन धर्म में चातुर्मास का विशेष महत्व होता है। इस दौरान जब भगवान विष्णु चार माह के लिए योगनिद्रा में होते हैं तो इसमें व्यक्तिक को पूजा-पाठ, मंत्र साधना, आराधना और भजन-कीर्तन करना शुभ होता है। चातुर्मास के दौरान खुद पर संयम, साधना, सेवा और तप करने से जीवन में शुभ परिणामों की प्राप्ति होती है। इसके अलावा चातुर्मास के अवधि के दौरान साधु-संतों का संगत करना और दान-पुण्य का काम करना विशेष फलदायी होता है।