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Amarnath Yatra 2019: अमरनाथ गुफा और इसके कुछ रहस्य, जानकर हो जाएंगे हैरान
Sat, 29 Jun 2019 03:15 PM IST
विनोद शुक्ला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Sat, 29 Jun 2019 03:15 PM IST
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अमरनाथ यात्रा 2019
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भगवान शिव के कई पवित्र धामों में एक धाम अमरनाथ गुफा भी है। अमरनाथ की यह गुफा जम्मू-कश्मीर राज्य में स्थित है। अमरनाथ गुफा में ही भगवान भोले शंकर ने माता पार्वती को अमरत्व की कहानी सुनाई थी। अमरनाथ गुफा में बाबा के दर्शन मात्र से ही जीवन की कई तरह की बाधाओं को व्यक्ति आसानी से पार कर जाता है। 1 जुलाई से अमरनाथ की पवित्र यात्रा शुरू होने जा रही है। इस गुफा में हर साल प्राकृतिक रूप से शिवलिंग का निर्माण होता है जिसके दर्शन करने के लिए देश-विदेश से भोले के भक्त आते हैं। आइए जानते हैं अमरनाथ गुफा का महत्व और इसके कुछ रहस्य....
अमरनाथ गुफा का महत्व
मान्यता के अनुसार भगवान शिव ने माता पार्वती को इसी गुफा में बैठकर अमरत्व की कथा सुनाई थी। इस कारण से इस गुफा का इतना महत्व है। इस गुफा में हर साल प्राकृतिक रूप से ठोस बर्फ से शिवलिंग बनता है। शिवलिंग के अलावा पास में ही माता पार्वती और शिवपुत्र भगवान गणेश का भी बर्फ का लिंग बना हुआ होता है।
शिवलिंग और माता का शक्तिपीठ एक साथ
अमरनाथ गुफा में बाबा भोलेनाथ जहां साक्षात विराजमान रहते हैं वहीं देवी सती का महामाया शक्तिपीठ भी है। इस स्थान पर देवी सति का कंठ गिरा था। एक साथ एक ही स्थान पर शिवलिंग और शक्तिपीठ के दर्शन से सभी तरह की मनोकामना की पूर्ति होती है।
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इन्होंने खोजी थी गुफा
अमरनाथ गुफा को करीब 500 साल पहले खोजा गया था और इसे खोजने का श्रेय एक मुस्लिम, बूटा मलिक को दिया जाता है। बूटा मलिक के वंशज अभी भी बटकोट नाम की जगह पर रहते हैं और अमरनाथ यात्रा से सीधे जुड़े हैं।
अमरकथा सुनाने से पहले सब कुछ त्यागा था
सबसे पहले भगवान शिव ने अपने नंदी का त्याग किया। जहां पर उन्होंने नंदी को छोड़ा उसे पहलगाम जाता है। अमरनाथ गुफा की यात्रा यहीं से आरम्भ होती है। इसके बाद अपनी जटा से चंद्रमा को मुक्त किया था। जहां पर चंद्रमा का त्याग किया वह चंदनवाणी कहलाती है।इसके बाद भगवान शंकर ने गले में धारण सांपों को छोड़ा। यह स्थान शेषनाग कहलाई गई। इसके बाद शिवजी ने गणेशजी को महागुणस पर्वत पर छोड़ दिया, महादेव ने जहां पिस्सू नामक कीडे़ को त्यागा, वह जगह पिस्सू घाटी है।
कबूतरों ने भी सुन ली थी अमरकथा
अमरकथा के दौरान कबूतरों को एक जोड़ा भी मौजूद था जो अमरकथा सुना रहा था और बीच-बीच में गूं-गूं की आवाज निकाल रहे थे। महादेव को लगा पार्वती कथा सुन रही हैं। अमरकथा सुनने से कबूतर अमर हो गए। गुफा में आज भी कबूतरों का जोड़ा दिखाई देता है। मान्यता है कि आज भी इन दो कबूतरों के दर्शन भक्तों को होते हैं।
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अमरनाथ गुफा का महत्व
मान्यता के अनुसार भगवान शिव ने माता पार्वती को इसी गुफा में बैठकर अमरत्व की कथा सुनाई थी। इस कारण से इस गुफा का इतना महत्व है। इस गुफा में हर साल प्राकृतिक रूप से ठोस बर्फ से शिवलिंग बनता है। शिवलिंग के अलावा पास में ही माता पार्वती और शिवपुत्र भगवान गणेश का भी बर्फ का लिंग बना हुआ होता है।
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शिवलिंग और माता का शक्तिपीठ एक साथ
अमरनाथ गुफा में बाबा भोलेनाथ जहां साक्षात विराजमान रहते हैं वहीं देवी सती का महामाया शक्तिपीठ भी है। इस स्थान पर देवी सति का कंठ गिरा था। एक साथ एक ही स्थान पर शिवलिंग और शक्तिपीठ के दर्शन से सभी तरह की मनोकामना की पूर्ति होती है।
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इन्होंने खोजी थी गुफा
अमरनाथ गुफा को करीब 500 साल पहले खोजा गया था और इसे खोजने का श्रेय एक मुस्लिम, बूटा मलिक को दिया जाता है। बूटा मलिक के वंशज अभी भी बटकोट नाम की जगह पर रहते हैं और अमरनाथ यात्रा से सीधे जुड़े हैं।
अमरकथा सुनाने से पहले सब कुछ त्यागा था
सबसे पहले भगवान शिव ने अपने नंदी का त्याग किया। जहां पर उन्होंने नंदी को छोड़ा उसे पहलगाम जाता है। अमरनाथ गुफा की यात्रा यहीं से आरम्भ होती है। इसके बाद अपनी जटा से चंद्रमा को मुक्त किया था। जहां पर चंद्रमा का त्याग किया वह चंदनवाणी कहलाती है।इसके बाद भगवान शंकर ने गले में धारण सांपों को छोड़ा। यह स्थान शेषनाग कहलाई गई। इसके बाद शिवजी ने गणेशजी को महागुणस पर्वत पर छोड़ दिया, महादेव ने जहां पिस्सू नामक कीडे़ को त्यागा, वह जगह पिस्सू घाटी है।
कबूतरों ने भी सुन ली थी अमरकथा
अमरकथा के दौरान कबूतरों को एक जोड़ा भी मौजूद था जो अमरकथा सुना रहा था और बीच-बीच में गूं-गूं की आवाज निकाल रहे थे। महादेव को लगा पार्वती कथा सुन रही हैं। अमरकथा सुनने से कबूतर अमर हो गए। गुफा में आज भी कबूतरों का जोड़ा दिखाई देता है। मान्यता है कि आज भी इन दो कबूतरों के दर्शन भक्तों को होते हैं।