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इस शक्ति से जीवन में सफलता और धन हासिल कर सकते हैं
शिवकुमार गोयल
Updated Wed, 01 Jan 2014 10:36 AM IST
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प्रकृति और मानव मन-मस्तिष्क में अनूठी क्षमता होती है। यदि मनुष्य बुद्धि विवेक से प्रकृति का उपयोग करे, तो वह सदैव वरदान के रूप में कल्याणकारी होता है। सद्गुण-दुर्गुण प्रत्येक व्यक्ति की अंतःचेतना में विद्यमान रहते हैं।
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मिट्टी में उर्वरा शक्ति होती है। उसमें जैसा बीज बोया जाता है, वैसा ही फल उगता है। ईश्वर और प्रकृति ने मनुष्य को जो शक्तियां प्रदान की हैं, यदि उनका सदुपयोग किया जाए, तो असीमित सुख-समृद्धि से संपन्न बना जा सकता है।
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जाने-माने चिंतक पुष्कर लाल केडिया लिखते हैं, पृथ्वी की भांति मनुष्य की कर्मभूमि भी उर्वरा है। यदि उसे सदाचारों से जोतें, उत्तम विचारों से सींचें और सत्कार्यों के बीज बोएं, तो पुण्य और कीर्ति की फसल लहलहाएगी।
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इसी तरह, यदि मस्तिष्क की उर्वरता का भी हम ठीक से उपयोग करें, श्रेष्ठ चिंतन के बीज बोएं, बुद्धि से सींचें, विवेक का उर्वरक डालें, तो नवनिर्माण की हरियाली जन्म लेगी।
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इसलिए मन-मस्तिष्क का विवेकपूर्ण उपयोग वरदानकारी है, वहीं इसका दुरुपयोग करने पर परिणाम अभिशाप के रूप में सामने आता है। व्यक्ति को हमेशा जीवन को श्रेष्ठ कार्यों से कृतार्थ करना चाहिए।