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महात्मा बुद्घ ने बताया ऐसा उपाय मोटापा दूर हो गया

Wed, 04 Dec 2013 04:59 PM IST
शिवकुमार गोयल
शिवकुमार गोयल Updated Wed, 04 Dec 2013 04:59 PM IST
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shiv kumar goyal story of mahatma buddha

भगवान बुद्ध श्रावस्ती के निकट एक गांव में ठहरे हुए थे। अनेक व्यक्ति उनके सत्संग के लिए आते रहते थे। एक दिन एक धनी व्यक्ति उनके दर्शन के लिए पहुंचा। भारी-भरकम बेडौल शरीर के कारण उससे अच्छी तरह चला भी नहीं जा रहा था।

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वह झुककर उन्हें प्रणाम भी नहीं कर पाया। उसने खड़े-खड़े विनम्रता से कहा, भगवन, मेरा शरीर अनेक व्याधियों का अड्डा बन चुका है। रात को न नींद आ पाती है और न दिन में चैन से बैठ पाता हूं। मुझे रोगमुक्ति का साधन बताने की अनुकंपा करें।
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भगवान बुद्ध ने कहा, प्रचुर भोजन करने से उत्पन्न आलस्य और निद्रा, भोग व अनंत इच्छाओं की कामना, शारीरिक श्रम का अभाव- ये सब रोग पनपने के कारण हैं। जीभ पर नियंत्रण रखने, संयमपूर्वक सादा सात्विक भोजन करने, शारीरिक श्रम करने, सत्कर्मों में रत रहने और अपनी इच्छाएं सीमित करने से ये रोग स्वतः विदा होने लगते हैं।
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असीमित इच्छाएं और अपेक्षाएं शरीर को घुन की तरह जर्जर बना डालती हैं, इसलिए सबसे पहले उन्हें त्यागो। सेठ ने उनके वचनों का पालन करने का संकल्प लिया और लौट गया। एक महीने में ही वह स्वस्थ हो गया। उसने बुद्ध के पास जाकर कहा, शरीर का रोग तो आपकी कृपा से दूर हो गया।


अब चित्त का प्रबोधन कैसे हो? बुद्ध ने कहा, अच्छा सोचो, अच्छा करो और अच्छे लोगों का संग करो। विचारों का संयम चित्त को शांति और संतोष देगा। सेठ बुद्ध के बताए मार्गों पर चलने लगा।

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