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धनवान बनने के चक्कर में कर बैठा भयानक गलती

Thu, 27 Nov 2014 03:17 PM IST
सुज्ञ
सुज्ञ Updated Thu, 27 Nov 2014 03:17 PM IST
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Destruction of health in pursuit of earnings

सेठ विमलदास अपना काम-धंधा बढ़ाने में दिन-रात लगे रहते थे। अपनी चाहत के अनुसार वह नगर के सबसे धनी सेठ बन ही गए। उन्होंने एक शानदार घर बनवाया। गृहप्रवेश के दिन उन्होंने भोज रखा। भोज निपट गया और सारे मेहमान चले गए, तो वह भी अपने कमरे में चले आए। जैसे ही बिस्तर पर लेटे, एक आवाज उन्हें सुनाई पड़ी, मैं तुम्हारी आत्मा हूं, और अब मैं तुम्हारा शरीर छोड़ कर जा रही हूं।

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सेठ घबरा कर बोले, अरे! तुम ऐसा नहीं कर सकती। तुम्हारे बिना तो मैं मर ही जाऊंगा। सुख-सुविधा से भरपूर यह आलीशान घर मैंने तुम्हारे लिए ही तो बनाया है। तुम यहां से मत जाओ।
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आत्मा बोली, यह मेरा घर नहीं है। मेरा घर तो तुम्हारा शरीर था। तुम्हारा स्वास्थ्य ही उसकी मजबूती था। किंतु करोड़ों कमाने के चक्कर में तुमने इसकी निरंतर अवहेलना की। अब इस निवास को ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, थायरॉइड, मोटापा, कमर दर्द जैसी बीमारियों ने घेर लिया है।
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तुम ठीक से चल नहीं पाते, रात को तुम्हें नींद नहीं आती, तुम्हारा दिल भी कमजोर हो चुका है। तनाव के कारण यह शरीर न जाने और कितनी बीमारियों का घर बन चुका है।

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अब तुम ही बताओ, क्या तुम किसी ऐसे जर्जर घर में रहना चाहोगे, जिसके चारों ओर कमजोर व असुरक्षित दीवारें हो, जिसका ढांचा चरमरा गया हो, फर्नीचर को दीमक खा रहा हो, जिसकी छत टपक रही हो, जिसके खिड़की-दरवाजे टूट चुके हों? नहीं न, इसलिए मैं भी ऐसे शरीर में नहीं रह सकती, जो असमर्थ हो चुका हो।


सेठ पश्चाताप करने लगे। अब आत्मा को रोकने का न तो उनमें सामर्थ्य बचा था, और न ही साहस। एक गहरी निश्वास छोड़ते हुए आत्मा सेठ के शरीर से निकल पड़ी। सेठ का पार्थिव शरीर बंगले में पड़ा रहा।

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