{"_id":"8a95e1bad09b2dfcff5ac39f08d6b7ff","slug":"art-can-learn-to-look-within-hindi","type":"story","status":"publish","title_hn":"क्या कभी चाय पीते हुए ऐसा अनुभव किया है आपने?","category":{"title":"Metaphysical","title_hn":"परामनोविज्ञान","slug":"metaphysical-parasychology"}}
क्या कभी चाय पीते हुए ऐसा अनुभव किया है आपने?
धर्मरक्षित
Updated Mon, 15 Sep 2014 11:20 AM IST
विज्ञापन
नैन इन एक जापानी जेन मास्टर थे। उनकी प्रसिद्धि चारों ओर फैली हुई थी। उनके पास कई मुमुक्षु ध्यान की कला सीखने आया करते थे। एक बार एक प्रोफेसर उनके पास आए और उनसे जेन के बारे में कुछ पूछने लगे। पूछते-पूछते उन्होंने कुछ सवाल अपने बारे में भी किया और फिर पूछने से ज्यादा वह खुद के बारे में ही बताने लगे।
विज्ञापन
पढ़ें,साप्ताहिक राशिफल: 15 सितंबर से 21 सितंबर तक
विज्ञापन
मास्टर नैन ने इस बीच प्रोफेसर के लिए चाय मंगवाई। प्रोफेसर का अपने बारे में बताना जारी था। चाय आने के बाद मास्टर केतली से कप में चाय डालने लगे। प्रोफेसर अब भी अपनी ही बात किए जा रहे थे। मास्टर का चाय उड़ेलना जारी रहा। कप भर जाने के बाद भी मास्टर उसमें चाय डालते रहे।
विज्ञापन
इससे चाय जमीन पर गिरने लगी। यह देखकर प्रोफेसर से रहा नहीं गया। उन्होंने मास्टर को तत्काल रोकते हुए कहा, यह कप तो भर चुका है। इसमें और चाय नहीं आ सकती। फिर क्यों आप इसमें चाय उड़ेल रहे हैं? इससे तो चाय नीचे गिरकर बर्बाद हो रही है।
पढ़ें,सूर्य-राहु का बन रहा योग, आपकी राशि पर क्या प्रभाव डालेगा
इस पर मास्टर नैन ने कप में चाय डालना बंद कर दिया और प्रोफेसर की ओर देखकर कहा, इस कप की तरह तुम भी अपने विचारों और ख्यालों से भरे हुए हो। यह सुनना था कि प्रोफेसर चुप हो गया। मानो उसे सांप सूंघ गया हो। उसे चुप हुआ देखकर मास्टर नैन वहां से उठकर चले गए।
कोई तीन घंटे बाद वह वापस लौटे। प्रोफेसर तब भी अविचल बैठे हुए थे। ठीक उसी तरह, जिस तरह मास्टर के जाने वक्त वह थे। मास्टर ने उनकी आंखों में झांका। उनकी पलकें उघाड़ कर देखा, और जेन सीखने आए दूसरे साधकों से कहा, अब प्रोफेसर के लिए कुछ सिखाना जरूरी नहीं है। वह जेन के बारे में जान गए हैं कि अपने भीतर कैसे उतरा जाए।