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Sheetala Ashtami 2025: 22 मार्च को शीतला अष्टमी, जानिए तिथि, मुहूर्त और महत्व

Mon, 17 Mar 2025 03:34 PM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: विनोद शुक्ला Updated Mon, 17 Mar 2025 03:34 PM IST
सार

Sheetala Ashtami 2025: चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 22 मार्च को को सुबह 04 बजकर 23 मिनट पर शुरू होगी और समापन अगले दिन यानी 23 मार्च को सुबह 05 बजकर 23 मिनट पर होगा। ऐसे में 22 मार्च को शीतला अष्टमी मनाई जाएगी।

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Sheetala Ashtami 2025 Date Puja Muhurat and Significance All You Need to Know
शीतला अष्टमी 2025 - फोटो : amar ujala

विस्तार

Sheetala Ashtami 2025: शीतला अष्टमी हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण पर्व है, जिसे माता शीतला की आराधना के लिए मनाया जाता है। यह पर्व होली के आठवें दिन, यानी चैत्र कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। पंचांग के अनुसार, चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 22 मार्च को को सुबह 04 बजकर 23 मिनट पर शुरू होगी और समापन अगले दिन यानी 23 मार्च को सुबह 05 बजकर 23 मिनट पर होगा। ऐसे में 22 मार्च को शीतला अष्टमी मनाई जाएगी। लेकिन लोकमान्यताओं के अनुसार कही-कही शीतला अष्टमी का पूजन शुक्रवार यानि 21 मार्च को 'ठंडा दिन' मानते हुए इस दिन भी मनाया जाएगा। इस दिन महिलाएं विशेष रूप से अपने परिवार की सुख-समृद्धि और संतान की लंबी उम्र के लिए व्रत रखती हैं। इस व्रत में ताजा भोजन बनाने की मनाही होती है, इसलिए इसे 'बसौड़ा' भी कहा जाता है।

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शीतला अष्टमी का महत्व
माता शीतला को रोगों की नाशक देवी माना जाता है। विशेष रूप से चेचक, खसरा, और अन्य संक्रामक बीमारियों से रक्षा के लिए इनकी पूजा की जाती है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, माता शीतला के पूजन से महामारी और रोगों का नाश होता है और परिवार स्वास्थ्य और समृद्धि प्राप्त करता है।
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शीतला अष्टमी की पूजा विधि
इस दिन प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण किए जाते हैं और व्रत का संकल्प लिया जाता है। पूजा के लिए घर या मंदिर में माता शीतला की मूर्ति या चित्र स्थापित किया जाता है। माता को जल, अक्षत, रोली, हल्दी, चंदन और फूल अर्पित किए जाते हैं। इस पूजा की सबसे खास बात यह है कि माता को ताजा भोजन का भोग नहीं लगाया जाता, बल्कि एक दिन पहले बना भोजन अर्पित किया जाता है। इसे बसौड़ा प्रसाद के रूप में जाना जाता है, जिसमें पूड़ी, कढ़ी, चावल, मिठाई आदि शामिल होते हैं। पूजा के दौरान शीतला माता की कथा का पाठ करना अत्यंत शुभ माना जाता है। कथा सुनने और सुनाने से परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है और रोगों से सुरक्षा मिलती है। इस दिन जरूरतमंद लोगों को भोजन, वस्त्र, और अन्य आवश्यक चीजें दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है।मंदिर में जाकर माता शीतला को हल्दी, चूड़ी, सिंदूर आदि अर्पित करना भी शुभ माना जाता है।

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शीतला अष्टमी के नियम

  • इस दिन घर में चूल्हा जलाने की मनाही होती है, इसलिए भोजन एक दिन पहले ही बना लिया जाता है।
  • माता शीतला की पूजा के दौरान श्रद्धा और शांति का पालन करना चाहिए, अधिक शोर-शराबा नहीं करना चाहिए।
  • व्रतधारी को सात्विक आहार ग्रहण करना चाहिए और दिनभर संयम एवं भक्ति भाव बनाए रखना चाहिए।
  • बासी भोजन को श्रद्धा के साथ ग्रहण करना चाहिए और इसे अपवित्र नहीं मानना चाहिए।
  • पूजा के बाद माता शीतला का चरणामृत ग्रहण करना चाहिए और बच्चों को भी देना चाहिए, जिससे वे रोगों से सुरक्षित रहें।
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