फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Spirituality ›   Festivals ›   Shabe Barat Kab Hai 2024 Know Date and inportance in hindi

आज है शब-ए-बारात, जानें इसकी खासियत और क्या मगफिरत की रात

Sun, 25 Feb 2024 01:25 PM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: श्वेता सिंह Updated Sun, 25 Feb 2024 01:25 PM IST
सार

हर साल शाबान महीने की 15वीं तारीख को शब ए- बारात मनाया जाता है। ये शब्द दो शब्दों से मिलकर बना हुआ है। शब का मतलब होता है रात और बारात का मतलब होता है बरी करना । इस रात मुसलमान पूरी रात नमाज अदा करते हैं, कुरान पढ़ते हैं और अल्लाह से अपने पापों के लिए क्षमा मांगते हैं। इस दिन मुस्लिम समुदाय के लोग अपनो की सलामती के लिए दुआ भी मांगते हैं।

विज्ञापन
Shabe Barat Kab Hai 2024 Know Date and inportance in hindi
कब है शब-ए-बारात - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

Shabe Barat Kab Hai: शब ए-बारात का त्योहार इस्लाम धर्म के सबसे महत्वपूर्ण त्योहार में से एक है। इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार हर साल शाबान महीने की 15वीं तारीख को शब ए- बारात मनाया जाता है। ये शब्द दो शब्दों से मिलकर बना हुआ है। शब का मतलब होता है रात और बारात का मतलब होता है बरी करना । इस रात मुसलमान पूरी रात नमाज अदा करते हैं, कुरान पढ़ते हैं और अल्लाह से अपने पापों के लिए क्षमा मांगते हैं। इस दिन मुस्लिम समुदाय के लोग अपनो की सलामती के लिए दुआ भी मांगते हैं। ऐसा माना जाता है कि इस रात अगर सच्चे दिल से इबादत की जाए तो वो जरूर पूरी होती है। इस्लामी कैलेंडर के मुताबिक शब-ए-बारात हर साल शाबान के महीने में आती है। शाबान इस्लामी साल का आठवां महीना होता है। शाबान का महीना रजब के महीने के बाद आता है। इस्लामिक कैलेंडर के मुताबिक 12 फरवरी पीर यानी सोमवार के दिन शाबान का महीना शुरू होगा। शाबान के महीने की 15वीं तारीख को शब-ए-बारात मनाई जाती है। आइए जानते हैं कब है शब ए- बारात और क्या है इसका महत्व। 

विज्ञापन


कब है शब-ए-बारात 2024?
इस्लामी कैलेंडर के मुताबिक शब-ए-बारात शाबान महीने की 14 और 15वीं तारीख के बीच की रात को मनाई जाती है. इस साल शब-ए-बारात 25 फरवरी 2024 रविवार के दिन पड़ सकती है। हालांकि इसकी तारीख चांद के हिसाब से आगे-पीछे हो सकती है। 
विज्ञापन


शब-ए-बारात की क्या है खासियत?
शब-ए-बारात की रात में आने वाले साल के तमाम कुदरती कामों का लेखा-जोखा करने की जिम्मेदारी अल्लाह फरिश्तों को देता है। कुछ लोगों का मानना है कि इस रात में खास इबादत की जाती है। इस रात में नफली इबादत की जा सकती है। नफली इबादत यानी नफील नमाज़ पढ़ना, कुरान की तिलावत करना,अल्लाह का जिक्र करना और दुआ करना। 
विज्ञापन
विज्ञापन


क्यों कहते हैं मगफिरत की रात
इस रात को बख्शीश की रात यानी मगफिरत की रात भी कहा जाता है। इस रात मुस्लिम लोग जागकर अपने गुनाहों की माफी मांगते हैं। इस रात में की गई इबादत से गुनाहों से छुटकारा मिलता है। जरूरी नहीं कि इस रात की नमाज जमात के साथ ही पढ़ी जाए, इसे लोग अपने घरों में अलग-अलग पढ़ें तो ज्यादा बेहतर है। शब-ए-बारात पर लोग कब्रिस्तान जाते हैं और इंतकाल फरमा गए लोगों की कब्र पर उनकी मगफिरत के लिए दुआ मांगते हैं।  इस्लाम धर्म में पांच ऐसी रातें बताई गई हैं जिन रात में मांगी गई दुआ जरूर कुबूल होती है। पहली जुमे की रात, दूसरी ईद-उल-फितर की रात, तीसरी ईद-उल-अजहा की रात, चौथी रजब की रात और पांचवीं निस्फ़ शाबान यानी शब-ए-बारात। इन रातों में दुआ मांगने से हर गुनाह माफ हो जाता है।

विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें आस्था समाचार से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। आस्था जगत की अन्य खबरें जैसे पॉज़िटिव लाइफ़ फैक्ट्स,स्वास्थ्य संबंधी सभी धर्म और त्योहार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed